परमेश्वर कबीर जी की ज्ञान लीलाएं

परमेश्वर कबीर जी की ज्ञान लीलाएं
धरती पर सतलोक संत रामपाल जी महाराज ने उतार दिया है सतलोक आश्रम में

सोमवार, 29 दिसंबर 2025

आध्यात्मिक सत्य : शास्त्र, साधना और प्रलय का रहस्य जानिए यहां ..

🔱 आध्यात्मिक सत्य : शास्त्र, साधना और प्रलय का रहस्य 🔱

यह लेख गीता, उपनिषद और संतवाणी के आधार पर आध्यात्मिक प्रश्नों का स्पष्ट उत्तर देता है।


❓ 1. मनुष्य ना चाहते हुए भी पाप क्यों करता है?

श्रीमद्भगवद्गीता 3.36–37 में अर्जुन पूछते हैं कि मनुष्य इच्छा के विरुद्ध पाप क्यों करता है।

उत्तर: काम, क्रोध और लोभ — जो रजोगुण से उत्पन्न होते हैं — मनुष्य को पाप कर्मों में प्रवृत्त करते हैं।

❓ 2. ब्रह्मरंध्र क्या है? नहीं खुला तो क्या होता है?

ब्रह्मरंध्र सिर के शीर्ष पर स्थित वह दिव्य द्वार है जिससे आत्मा के निकलने पर पुनर्जन्म समाप्त हो जाता है।

  • पूर्ण गुरु से दीक्षा
  • सत्य नाम-स्मरण
  • अहंकार का त्याग

यदि ब्रह्मरंध्र नहीं खुलता, तो आत्मा अन्य द्वारों से निकलकर पुनर्जन्म में जाती है।

❓ 3. कमल (चक्र) खुलने पर भक्ति शक्ति कैसे बढ़ती है?

शरीर के सूक्ष्म कमल ऊर्जा केंद्र हैं। इनके जाग्रत होने पर:

  • मन अंतर्मुखी होता है
  • प्राण स्थिर होता है
  • नाम-स्मरण गहरा होता है

👉 भक्ति भावना नहीं, आध्यात्मिक शक्ति बन जाती है।

⏳ 4. कल्प, महाकल्प और दिव्य महाकल्प

  • कल्प: ब्रह्मा का 1 दिन = 4.32 अरब वर्ष
  • महाकल्प: ब्रह्मा के 100 वर्ष
  • दिव्य महाकल्प: सतलोक का समय — कालातीत

🔥 5. तीन महाप्रलय का सत्य

  1. नैमित्तिक प्रलय – ब्रह्मा की रात्रि
  2. प्राकृत प्रलय – ब्रह्मांड व देवताओं का नाश
  3. दिव्य महाप्रलय – काल, माया और सृष्टि का अंत

❓ 6. क्या काल और दुर्गा अमर हैं?

नहीं। शास्त्रों के अनुसार काल (क्षर ब्रह्म) और दुर्गा (प्रकृति) भी तीसरी दिव्य प्रलय में समाप्त होते हैं।

❓ 7. तीसरी दिव्य महाप्रलय कौन करता है?

यह प्रलय परम अक्षर ब्रह्म (सतपुरुष) की सत्ता से होती है।

👉 केवल सतलोक और मुक्त आत्माएँ शेष रहती हैं।

❓ 8. सत्य कहना निंदा है क्या?

शास्त्र प्रमाण सहित कहा गया सत्य निंदा नहीं बल्कि चेतावनी और सुधार है।

“निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय” – कबीर साहेब


🌼 निष्कर्ष 🌼

✔ पाप का कारण काम है
✔ मोक्ष का द्वार ब्रह्मरंध्र है
✔ भक्ति शक्ति है, भावना नहीं
✔ सत्य कहना धर्म है, निंदा नहीं

📌 शास्त्र पढ़िए • सत्य जानिए • अंधविश्वास से बचिए

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