रविवार, 28 मई 2017

मनमाना आचरण और सनातन भक्ति

🌱 ब्रेकिंग न्यूज़  🌱
सारा संसार लगा है प्रभु की आज्ञाओं को तोड़ मनमाने आचरण में तथा सनातन भक्ति मार्ग क्या है 

परमेश्वर ने मनुष्यो को प्रकृति का उपयोग करने के लिए गाइड दी जिसका नाम *वेद* हैं   जिसमे पूरी पृथ्वी सौर मंडल , यंत्रो यानो वाहनों  और स्वास्थ्य विज्ञानं  आदि के साथ साथ आध्यात्मिक विज्ञानं भी की सम्पूर्ण जानकारी थी ।
 कालान्तर में वेद लुप्त होने पर ब्रह्म द्वारा ऋषि वेदव्यास जी  के अंदर प्रवेश कर पुनः 4 भागो में प्रकट किये गए ।। और महाभारत में कृष्ण के अंदर प्रवेश कर ब्रह्म उर्फ़ महाकाल द्वारा वेदों का सार *गीता*जी में प्रकट किये गए ।। 
 मनुष्यो द्वारा सनातन परमेश्वर और सनातन लोक की प्राप्ति के लिए   वेदों का गहन अध्ययन किया गया व हिमालया पर हजारो लाखो वर्ष तप किया गया । तप से वो मनुष्य ऋषि हो गए और अनेको सिद्धियां आ गयी किन्तु सनातन परमेश्वर और सनातन लोक नही मिला और अपने अपने अनुभवो के उपनिषद बना लिए । कुछ ऋषियो ने योग द्वारा शरीर से निकल कर  ब्रह्म लोक से निचे तक के लोक और ब्रह्माण्ड खूब घुमे परंतु सनातन लोक नही मिला । गायत्री परिवार शांतिकुंज के संस्थापक  श्री राम आचार्य कहते है की मैं कई जन्मों से ऋषि हूँ सहस्रार चक्र से आगे 2 और चक्र है वो हम अनेको ऋषि कई जन्मों से नही खोल पाये हैं।शायद उनमे सनातन लोक की कोई जानकारी या मार्ग मिले । जब परमेश्वर की इच्छा होगी तब ही उसकी जानकारी और सनातन लोक की जानकारी संसार को मिलेगी और मैं आपको पुरे निश्चय से कहना चाहता हूँ की परमेश्वर की कृपा से यदि कोई संत आता है तो वो सनातन लोक और सनातन परमेश्वर की पूरी जानकारी देगा और वो अपने शिष्यो को प्रथम गुप्त गायत्री मन्त्र देगा शरीर के सारे चक्रों को खुलवायेगा और सहस्रार चक्र से ऊपर के चक्रों को खुलवाने वाले अन्य मन्त्र भी देगा । मेरे शिष्यो आप मुझको छोड़कर उसको सदगुरु ग्रहण करना ।। ))  इससे सिद्ध है की आचार्य भी मनमाने आचरण में लगे रहे सनातन परमेश्वर को पाने में हर जन्म में पूरी तरह असफल रहे चाहे उनमे कितनी भी सिध्दियां थी ।। 
गीता जी में प्रभु की आज्ञा है की  भक्तिमार्ग में संतुलित भोजन करो संतुलित जागो और सोओ 
बिलकुल भूखा न रहो अर्थात ब्रत न करो किन्तु संसार अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए प्रभू के इस आदेश को तोड़कर खूब ब्रत रखते हैं ।  फिर मनुष्य कहता फिरता है की खूब पूजा पाठ की किन्तु कोई फ़ायदा नही हुआ ।। 
गीता जी में प्रभु कहते है की  त्रिगुण देवो रजगुण ब्रह्मा सतगुण विष्णु तमोगुण शिव की भक्ति में लगा मनुष्यो में मुर्ख नीच दुष्ट राक्षसी स्वभाव को धारण किये ये मनुष्य मुझ ब्रह्म को भी नही भजता ।  अर्थात तीनो देवो की भक्ति को रिजेक्ट करता है ।  
।। मृत्युलोक में हम दो प्रभु अर्थात पुरुष अर्थात स्वामी हैं किन्तु पुरषोत्तम परमेश्वर तो कोई अन्य है और वो सनातन लोक में रहता है ।  मैं भी उसी आदिपुरुष परमेश्वर की शरण में हूँ ।।
हे अर्जुन यदि तू मेरी भक्ति करना चाहता है तो प्रणव मन्त्र का जाप कर और युद्ध भी कर 
यदि परम शांति अर्थात सनातन लोक चाहता है तो  परम अक्षर ब्रह्म की भक्ति कर और उसकी भक्ति का मन्त्र प्रणव तत् सत है । हे अर्जुन प्रणव मन्त्र को तू जनता है किन्तु तत् और सत् मन्त्र को जानने के लिए तू तत्त्व दर्शी संत के पास और उनकी चरण सेवा कर वो तुझको  गुप्त ज्ञान और गुप्त मंत्रो का उपदेश करेंगे ।
 मित्रो अर्जुन को तो तत्त्वदर्शी संत नही मिला किन्तु सनातन परमेश्वर ने हम सभी तुच्छ जीव जो मृत्युलोक में फंसे हैं को बचाने के लिए तत्त्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी को भेजा है कृपया वेदबित सारे ज्ञान उपदेश को समझे व सनातन परमेश्वर व सनातन लोक की प्राप्ति की एकमात्र सनातन भक्ति प्राप्त कीजिये ।। 
4सौ वर्ष पहले सनातन परमेश्वर कवीराग्नि गरीबदास जी को मिले और उनको गुरुपद प्रदान किया भक्ति दान दी जो क्रमशः संत शीतल दास् जी
संत ध्यानदास जी 
संत रामदास जी
संत ब्रह्मानंद जी
संत जुगतानंद जी
संत गंगेश्वरानंद जी
संत चिदानंद जी 
संत रामदेवानन्द जी से
चलती हुयी संत रामपाल जी तक पहुंची है आओ और अपना  कल्याण कराओ 
परम सन्त रामपाल जी द्वारा दिया जाने वाले गुप्त गायत्री मन्त्र में  सपत्नीक ब्रह्मा जी विष्णु जी और शिव जी  गणेशजी तथा देवी दुर्गा का गुप्त नाम मन्त्र शामिल है ।। इसके जाप से इन देवताओ का ऋण कर्ज उतरा जाता है और इनको साधा जाता है ये पांच देव हमारे मेरुदंड में पांच चक्रों में स्थित है मूल चक्र में गणेश जी स्वाद चक्र में ब्रह्मा जी नाभि चक्र में विष्णु जी  हृदय चक्र में शिव जी और कण्ठ चक्र में दुर्गा जी । और इस मंत्र में परमेश्वर के सदगुरु रूप का मन्त्र और सतपुरुष रूप का भी मन्त्र है ये हमारी भक्ति है और पाप नाशक मन्त्र है।
 दूसरी बार में परम सदगुरु तत्त्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज  प्रणव तत् सत में से प्रणव तत् को डिकोड करके स्वास् उस्वास् में जपने का अजपा जाप देते है इसके प्रभाव से ब्रह्मलोक का द्वार सहस्रार चक्र व् इसके ऊपर का चक्र अक्षर ब्रह्म का लोक द्वार खुल जाता है
इन दोनों में सफल होने पर आदि सत् मन्त्र सार नाम देते है जिससे  अक्षर ब्रह्म  के लोक चक्र से ऊपर परम अक्षर ब्रह्म का लोक सनातन लोक का द्वार खुलता है  और  स्थाई निवास प्राप्त होता है।।और जीब जन्म मृत्यु से सदैव के लिए मुक्त हो जाता है नूरी शरीर मिलता है जिसका प्रकाश16 सूर्यो जितना है ।  वहां यहाँ से अनंत गुना अच्छा अजर अमर स्वतः प्रकाशित संसार है ।। देर न करे  निः शुल्क नाम दीक्षा प्राप्त कर जीवन के हर एक क्षण का सदुपयोग करे 

बहुत ज्यादा विस्तार से जानने के लिए और गहराई से समझने के लिए परम सदगुरु संत रामपाल जी के मुख कमल से सुने अमृत बचन साधना टीवी पर रोज शाम 7:40 से 8:40 तक और इश्वर टीवी पर 8:30pmसे 9:30pm तक 
सुबह हरयाणा न्यूज़ पर  6 am से 7 am 
दोपहर श्रद्धा टीवी पर 2 pm से 3 pm
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शुक्रवार, 19 मई 2017

मृत्युलोक की रचना कब और क्यों हुयी जबकि जीव सनातन लोक में मस्त थे

उठो जागो और देखो परमेश्वर आ चूका है धरती पर 💜🌲




सनातन लोक में ऐसी क्या घटना घटी की मृत्युलोक की रचना हुयी और सनातन परमेश्वर कवीर के सनातन बच्चे असंख्य संख्या में अपने पिता और सनातन लोक को छोड़ मृत्यु लोक में आ फंसे और यहाँ घोर कष्ट उठा रहे है । इस मृत्युलोक का स्वामी कौन है । उसने क्यों जीवात्माओं को सारी बात भुला दी और जन्म मृत्यु में डाल दिया।   और अनेको धर्मो और भाषाओ में बाँट दिया  ।  आदि अनेको प्रश्नो का शास्त्रीय प्रमाणिक ज्ञान जानिए और वापस सनातन लोक जाने की एकमात्र शाश्त्र अनुकूल मूल भक्ति बिधि   भी प्राप्त कीजिये  वतमान में परमेश्वर कवीर के भेजे हुए एकमात्र संत रामपाल जी महाराज जी से ।।
💜💜💜💜💜💜💜💜💜💜💜💜💜
#अरे #अभी भी #नरक मे #सोये हो #उठो@उठो #देखो तो कौन आये है ये #पापी #भूमि मे #जहॉ ना सच@सत @प्यार@इंसानियत #सब #मरी पडी है @उठो #चूँक गये तो @घोर #नरक मे जाना #पडेगा हॉ #सोच लो #एक @बारी और#@
#पढो #ना बताओ #खुद को #ग्यानी #कहते हो?

#सत #साहिब #जी

😕सबका मालिक एक कौन है ?
😕सृष्टि की रचना किसने व्  कैसे की ?
😕ब्रह्मा विष्णु महेश के माता पिता कौन है ?
😕शेरावाली माता दुर्गाजी का पति कौन है और अगर नहीं है सिंदूर श्रृंगार और लाल चुनरिया किस वास्ते ?
😕हमको जन्म देने और मारने में किस प्रभु का स्वार्थ है ? हम क्यों जन्मते मरते है ?
😕84 लाख योनियां क्यों बनायीं गयी है ? क्या त्रिदेव दुर्गाजी 33 करोड़ देवी देवता का दिल पत्थर का है जो इतना कष्ट और मार काट दिया हुआ है जीवों को ?
   😕रेप के समय कोई भगवान क्यों न मदद करता ??
😕मानव जीवन का मुख्य उद्देश्य क्या है ?
😕परमात्मा की परिभाषा क्या है ?
😕क्या आपको पता है गीता का ज्ञान काल ने श्री कृष्ण जी के शरीर में प्रवेश हो कर बोला है ? पर क्यों और गीता में क्या राज की बातें है जो आज तक कोई समझ न पाया !!
😕श्री गुरु नानक देव जी के गुरु कौन थे ?
😕हम सभी देवी देवताओं की इतनी भक्ति करते है फिर भी दुःखी क्यों है ?
😕काल की परिभाषा क्या है ?
😕सतयुग में राम कृष्ण नहीं थे तब किसका धरते ध्यान ?
😕सच्चा ज़िहाद क्या होता है ? काफ़िर किसको कहते है ?
😕एक तू सच्चा एक तेरा नाम सच्चा यह वाक्य किसके वास्ते लिखा गया है ?
😕गर्भ में तो सब एक है फ़िर कलयुग में किसने और क्यों बाटा एक मानव को हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई व् अनेक पंथों और सम्प्रदायों में ?
😕अमेरिका जनगणना विभाग अनुसार रोज पृथ्वी पे 1,52,640 मनुष्यों की मृत्यु हो जाती है क्यों ?
😕युद्ध होने का कारण क्या है ?

😃अगर आप तृतीय विश्व युद्ध में अपनी और अपनों की जान बचाना चाहते है तो इस post को पढ़े और forward करें |
आपके 02 second पूरी मानवता को बहुत कुछ मदद दे सकते है !!
 😕एक विश्व को 209 देशों में और 2700 से ज्यादा भाषाओं में बाटने का मकसद क्या है ?
    😕 science और technology का आविष्कार परमात्मा ने किस मकसद से करवाया है ?
  😕   दुर्गाजी तो प्रकति देवी है Nature फिर ये बाढ़, सुखा , भुखमरी , भूकम्प , हैजा जैसी प्राकृतिक आपदाएं क्यों ?
   😕   मोक्ष क्या होता है और मुक्ति लेना क्यों जरुरी है ?
    😕 मुसलमान किसे कहते है ?
      😕  असली ब्राह्मण कौन है ?
    😕   सिक्ख किसे कहते है ? सिख और सरदार में अंतर क्या है ?
    😕  परमात्मा साकार है या निराकार ?
     😕 अल्लाह - ख़ुदा - रब - भगवान् के दीदार सम्भव है कि नहीं ?
     😕  परमात्मा हमें दिखाई क्यों न देते ?
    😕 ब्रह्मा विष्णु महेश दुर्गाजी और 33 करोड़ देवी देवता मिल कर भी मौत नहीं रोक पा रहे !! क्या कारण है क्या ये मौत रोकने में समर्थ नहीं ? तो कौन सी शक्तियां इनसे ऊपर है ? या ये मौत रोकना ही नहीं चाहते ?
    😕  ब्रह्मा विष्णु महेश भी अजर अमर नहीं ! पेज 123 श्रीमद्देविभागवादपुरान,
 गीताप्रेस गोरखपुर ।
😃 जानिये श्री गुरु नानक देव जी के 03 दिनों तक बेई नदी में गायब होने का राज !
😃 जानिये मृत्य उपरान्त कबीर साहेब के शरीर गायब हो जाने का राज !
😃 और गुरु नानक देवी जी ने ये क्यों कहा पेज 721 गुरु ग्रन्थ साहिब पे कि - " हक्का कबीर करीम तू बेऐब परवरदिगार " !!
😃 क़ुरआन शरीफ़ के सूरत फुर्कानि 25 आयत 52 पे लिखा है : फला तुतिअल काफिरन व् जाहिदहुम् विहि जिहादन कबीरा !
   😕 ऐसे अनेकों रहस्यों और अनसुलझे सवालों के जवाब जानने वास्ते कृपया रोज देखे :-
1. साधना टीवी रोज शाम 07:40 से 08:40
2. ख़बर फ़ास्ट रोज रात 09:30 से 10:30
3. हरियाणा न्यूज : रोज सुबह 06 से 07
📙अवश्य पढ़े पुस्तक " ज्ञान गंगा और धरती पर अवतार "
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👉� नोट : " ज्ञान गंगा "  पुस्तक निः शुल्क मंगवाने को अपना पूरा पता निम्न नंबरों पे SMS करें :-
7027000825
7027000826
7027000829
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अगर आप भारत को पुनः सोने की चिड़िया , भ्र्ष्टाचारमुक्तऔर जगतगुरू के रूप में देखना चाहते है तो एक बार इस website को अवश्य देखें ।
www.jagatgururampalji.com
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भगत विजय दास
Uttrakhand #Nainital @Bageshwar@Dewbhumi
whatsapp no. 8958802737
Only gyan charcha
मानुष जन्म दुर्लभ है, मिले नाबारंबार
तरूवर से पता टूट गिरे, बहुर न लगता डार।।
माँ अष्टंगी पिता निरंजन। वे जम दारुण वंशन अंजन।।
पहिले कीन्ह निरंजन राई। पीछेसे माया उपजाई।।
धर्मराय कीन्हाँ भोग विलासा।मायाको रही तब आसा।
तीन पुत्र अष्टंगी जाये। ब्रह्मा विष्णु शिव नाम धराये।।
ऋग्वेद मंडल न•9 सूक्त न•96 के मंतर न•17 मे प्रमाण है कि वो कवीर्देव है जो पृथ्वी पर शिशुरूप धारण करके आता है
कबीर, बेटा जाया ख़ुशी हुई, बहुत बजाये थाल।
आवण जाणा लग रहा,ज्यों कीड़ी का नाल।।
सत साहिब जी
अवश्य देखिया हॉ
नति बहुतै पछतला बाद मे
गांव रामनगर केलाखेड़ा बाज़पुर उत्तराखंड में 21 मई दिन रविवार को सुबह 10 बजे से दोपहर  1 बजे तक कवीर परमेश्वर के सत्संग में आप सभी परिवार सहित सादर आमंत्रित हैं ।।
जानिये ****************
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😕ब्रह्मा विष्णु महेश के माता पिता कौन है ?
😕शेरावाली माता दुर्गाजी का पति कौन है और अगर नहीं है सिंदूर श्रृंगार और लाल चुनरिया किस वास्ते ?
😕हमको जन्म देने और मारने में किस प्रभु का स्वार्थ है ? हम क्यों जन्मते मरते है ?
😕84 लाख योनियां क्यों बनायीं गयी है ? क्या त्रिदेव दुर्गाजी 33 करोड़ देवी देवता का दिल पत्थर का है जो इतना कष्ट और मार काट दिया हुआ है जीवों को ?
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😕मानव जीवन का मुख्य उद्देश्य क्या है ?
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😕क्या आपको पता है गीता का ज्ञान काल ने श्री कृष्ण जी के शरीर में प्रवेश हो कर बोला है ? पर क्यों और गीता में क्या राज की बातें है जो आज तक कोई समझ न पाया !!
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😕हम सभी देवी देवताओं की इतनी भक्ति करते है फिर भी दुःखी क्यों है ?
😕काल की परिभाषा क्या है ?
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    😕  परमात्मा साकार है या निराकार ?
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धर्मराय कीन्हाँ भोग विलासा।मायाको रही तब आसा।
तीन पुत्र अष्टंगी जाये। ब्रह्मा विष्णु शिव नाम धराये।।
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कबीर, बेटा जाया ख़ुशी हुई, बहुत बजाये थाल।
आवण जाणा लग रहा,ज्यों कीड़ी का नाल।।
सत साहिब जी
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😕सबका मालिक एक कौन है ?
😕सृष्टि की रचना किसने व्  कैसे की ?
😕ब्रह्मा विष्णु महेश के माता पिता कौन है ?
😕शेरावाली माता दुर्गाजी का पति कौन है और अगर नहीं है सिंदूर श्रृंगार और लाल चुनरिया किस वास्ते ?
😕हमको जन्म देने और मारने में किस प्रभु का स्वार्थ है ? हम क्यों जन्मते मरते है ?
😕84 लाख योनियां क्यों बनायीं गयी है ? क्या त्रिदेव दुर्गाजी 33 करोड़ देवी देवता का दिल पत्थर का है जो इतना कष्ट और मार काट दिया हुआ है जीवों को ?
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😕क्या आपको पता है गीता का ज्ञान काल ने श्री कृष्ण जी के शरीर में प्रवेश हो कर बोला है ? पर क्यों और गीता में क्या राज की बातें है जो आज तक कोई समझ न पाया !!
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😕हम सभी देवी देवताओं की इतनी भक्ति करते है फिर भी दुःखी क्यों है ?
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😕सतयुग में राम कृष्ण नहीं थे तब किसका धरते ध्यान ?
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  😕   दुर्गाजी तो प्रकति देवी है Nature फिर ये बाढ़, सुखा , भुखमरी , भूकम्प , हैजा जैसी प्राकृतिक आपदाएं क्यों ?
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    😕  परमात्मा साकार है या निराकार ?
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     😕  परमात्मा हमें दिखाई क्यों न देते ?
    😕 ब्रह्मा विष्णु महेश दुर्गाजी और 33 करोड़ देवी देवता मिल कर भी मौत नहीं रोक पा रहे !! क्या कारण है क्या ये मौत रोकने में समर्थ नहीं ? तो कौन सी शक्तियां इनसे ऊपर है ? या ये मौत रोकना ही नहीं चाहते ?
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😃 और गुरु नानक देवी जी ने ये क्यों कहा पेज 721 गुरु ग्रन्थ साहिब पे कि - " हक्का कबीर करीम तू बेऐब परवरदिगार " !!
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मानुष जन्म दुर्लभ है, मिले नाबारंबार
तरूवर से पता टूट गिरे, बहुर न लगता डार।।
माँ अष्टंगी पिता निरंजन। वे जम दारुण वंशन अंजन।।
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धर्मराय कीन्हाँ भोग विलासा।मायाको रही तब आसा।
तीन पुत्र अष्टंगी जाये। ब्रह्मा विष्णु शिव नाम धराये।।
ऋग्वेद मंडल न•9 सूक्त न•96 के मंतर न•17 मे प्रमाण है कि वो कवीर्देव है जो पृथ्वी पर शिशुरूप धारण करके आता है
कबीर, बेटा जाया ख़ुशी हुई, बहुत बजाये थाल।
आवण जाणा लग रहा,ज्यों कीड़ी का नाल।।
सत साहिब जी
अवश्य देखिया हॉ
नति बहुतै पछतला बाद मे

सोमवार, 2 जनवरी 2017

पत्रकारिता का गिरता स्तर 2017 new big news


सतलोक आश्रम न्यूज़
2 जनवरी 2017
                   "पत्रकारिता का गिरता स्तर"
प्रिंट मीडिया द्वारा जान भुज कर समिति संयोजक का नाम ओर तत्त्व दर्शी संत रामपाल जी महाराज के नाम मॆ उलट फेर करना मीडिया की घटिया मानसिकता दर्शाता है ! जब कोई ओर संस्था इस प्रकार सेवा करती है तो यही प्रिंट मीडिया कार्यक्रम को बडा चढ़ा दिखाती है ! पर तत्त्व दर्शी संत रामपाल जी महाराज़ के अनुयाइयों द्वारा बिना दहेज बिना किसी आडम्बर के शादी की जाती है !जिसे रमैणि बोलते हैं ! केवल मात्र अपने परमेश्वर स्वरूप गुरु संत रामपाल जी को साक्षी मानकर, उन्ही की वाणी चलाकर 16 मिनट मॆ बंधन मॆ बँध जाती हैं दो आत्माये !

सरकार लाखो करोड़ों रुपये एडवर्टाइज पर खर्च कर रही है दहेज प्रथा से छुटकारा पाने के लिये ओर तत्त्व दर्शी संत रामपाल जी अपनी शिक्षा से अपने ज्ञान से इस बुराई को जड़ से ख़त्म करना चाहते हैं ! इन संत के अनुयाइयों द्वारा बिना दहेज बिना ड्कोस्ले बिना कोई खर्च के शादी की जाती है ! जब लड़की के माँ बाप को लड़की की शादी पर होने वाले खर्च की चिंता नहीँ होगी तो क्यू होगी भूर्ण हत्या ? स्वतः ही नारी जाती की इज्जत बडेगि ! इसलिए प्रिंट मीडिया इलैक्ट्रॉनिक मीडिया ओर सरकार को उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिये तत्त्व दर्शी संत रामपाल जी महाराज ओर इनके अनुयाइयों का........

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2017 importent point for every one click here

  big imp. point must read 

😕सबका मालिक एक कौन है ?
😕सृष्टि की रचना किसने व् कैसे की ?
😕ब्रह्मा विष्णु महेश के माता पिता कौन है ?
😕शेरावाली माता दुर्गाजी का पति कौन है और अगर नहीं है सिंदूर श्रृंगार और लाल चुनरिया किस वास्ते ?
😕हमको जन्म देने और मारने में किस प्रभु का स्वार्थ है ? हम क्यों जन्मते मरते है ?
😕84 लाख योनियां क्यों बनायीं गयी है ? क्या त्रिदेव दुर्गाजी 33 करोड़ देवी देवता का दिल पत्थर का है जो इतना कष्ट और मार काट दिया हुआ है जीवों को ?
😕मानव जीवन का मुख्य उद्देश्य क्या है ?
😕परमात्मा की परिभाषा क्या है ?
😕क्या आपको पता है गीता का ज्ञान काल ने श्री कृष्ण जी के शरीर में प्रवेश हो कर बोला है ? पर क्यों और गीता में क्या राज की बातें है जो आज तक कोई समझ न पाया !!
😕श्री गुरु नानक देव जी के गुरु कौन थे ?
😕हम सभी देवी देवताओं की इतनी भक्ति करते है फिर भी दुःखी क्यों है ?
😕काल की परिभाषा क्या है ?
😕सतयुग में राम कृष्ण नहीं थे तब किसका धरते ध्यान ?
😕सच्चा ज़िहाद क्या होता है ? काफ़िर किसको कहते है ?
😕एक तू सच्चा एक तेरा नाम सच्चा यह वाक्य किसके वास्ते लिखा गया है ?
😕गर्भ में तो सब एक है फ़िर कलयुग में किसने और क्यों बाटा एक मानव को हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई व् अनेक पंथों और सम्प्रदायों में ?
😕अमेरिका जनगणना विभाग अनुसार रोज पृथ्वी पे 1,52,640 मनुष्यों की मृत्यु हो जाती है क्यों ?

🤔एक विश्व को 209 देशों में और 2700 से ज्यादा भाषाओं में बाटने का मकसद क्या है ?
🤔 science और technology का आविष्कार परमात्मा ने किस मकसद से करवाया है ?
🤔दुर्गाजी तो प्रकति देवी है Nature फिर ये बाढ़, सुखा , भुखमरी , भूकम्प , हैजा जैसी प्राकृतिक आपदाएं क्यों ?
🤔मोक्ष क्या होता है और मुक्ति लेना क्यों जरुरी है ?
🤔मुसलमान किसे कहते है ?
🤔असली ब्राह्मण कौन है ?
🤔सिक्ख किसे कहते है ? सिख और सरदार में अंतर क्या है ?
🤔परमात्मा साकार है या निराकार ?
🤔अल्लाह - ख़ुदा - रब - भगवान् के दीदार सम्भव है कि नहीं ?
🤔परमात्मा हमें दिखाई क्यों न देते ?
🤔ब्रह्मा विष्णु महेश दुर्गाजी और 33 करोड़ देवी देवता मिल कर भी मौत नहीं रोक पा रहे !! क्या कारण है क्या ये मौत रोकने में समर्थ नहीं ? तो कौन सी शक्तियां इनसे ऊपर है ? या ये मौत रोकना ही नहीं चाहते ?
🤔ब्रह्मा विष्णु महेश भी अजर अमर नहीं ! पेज 123 श्रीमद्देविभागवादपुरान,
 गीताप्रेस गोरखपुर ।
😃 जानिये श्री गुरु नानक देव जी के 03 दिनों तक बेई नदी में गायब होने का राज !
😃 जानिये मृत्य उपरान्त कबीर साहेब के शरीर गायब हो जाने का राज !
😃 और गुरु नानक देवी जी ने ये क्यों कहा पेज 721 गुरु ग्रन्थ साहिब पे कि - " हक्का कबीर करीम तू बेऐब परवरदिगार " !!
😃 क़ुरआन शरीफ़ के सूरत फुर्कानि 25 आयत 52 पे लिखा है : फला तुतिअल काफिरन व् जाहिदहुम् विहि जिहादन कबीरा !
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सत् साहेब

शनिवार, 21 मई 2016

उस सच्चे संत को खोज लो जो सच्ची सच्ची बात बतावे - निरंकारी बाबा हरदेव जी

पूर्ण सच्चे संत की पहचान जो सच्ची सच्ची बात बतावे 


पूर्ण सन्त की पहचान व उसके लक्षण हमारे सद्ग्रन्थों में लिखे हुए है जी...पूर्ण सन्त की पहचान के लिए आप सभी सन्तों के ज्ञान का अध्ययन करिये..क्योंकि ज्ञान से ही सन्त की पहचान होगी। जो सन्त शास्त्रानुकूल ज्ञान देता है वह पूर्ण ज्ञानी सन्त होगा और जो सन्त शास्त्रों के विपरीत ज्ञान बताता है अर्थात् सिलेबस(शास्त्रों) के बाहर जाकर ज्ञान देता है वह नकली और अज्ञानी है।
आपजी सभी धर्मगुरुओं की किताबों का तुलनात्मक अध्ययन करिये। उनके प्रवचन सुन कर खुद समझिये कि इन धर्म गुरूओं द्वारा कही जा रही बातो का उल्लेख किसी धर्म शाश्त्र में है या कि नहीं है। जहा पर इन धर्म गुरूओ का ज्ञान समझ मे ना आये तब इनसे प्रश्न करिये और बार बार प्रश्न करिये। इस तरह सच्चाई का पता अपने आप चल जायेगा।
कबीर भेष देख मत भूलिये, बूझ लीजिये ज्ञान।
बिना कसौटी होत नहीं, कंचन की पहिचान।।
विश्व मे तत्वदर्शी सन्त रामपाल जी महाराज ही ऐसे सन्त है जो हमारे सदग्रन्थो में से प्रमाण सहित ज्ञान को निकाल निकाल कर समझाते है.. पर दुर्भाग्य की बात है कि उनको षड्यंत्र के तहत जेल मे डाला गया है। आप अगर सदग्रन्थों का निष्कर्ष समझना चाहते है तो आप तत्वदर्शी सन्त रामपाल जी महाराज के अमृत वचनो को 'साधना टीवी पर शाम 7 बजकर 40 से 8 बजकर 40 मिनट' तक सुने, साथ में कापी कलम लेकर बैठे। वह जो भी प्रमाण जिस दिन भी दिखाये उन प्रमाणो को नोट करे। तत्पश्चात उन प्रमाणो का मिलान अपने ग्रन्थो से करे। इस तरह शास्त्रों में स्थित ज्ञान को आसानी से समझ सकते है। जहा पर समझ मे ना आते हो तब सन्त रामपाल जी महाराज के अनुयायियों से अपनी जिज्ञासा का समाधान जरूर करे जी।
ज्ञान गंगा को पढे..यदि आपके ज्ञान समझ मे आये तब आप जरूर उपदेश ले। पूरे विश्व मे सन्त रामपाल जी महाराज ही ऐसे सन्त है जो हमेशा ही प्रत्येक बात का जबाव विस्तार से देते है व जिज्ञासुओ की प्रत्येक शंका का समाधान करते है।
आज लाखों करोडो की संख्या में दूसरे सभी पंथो व संतो से लोग जुडे हुए है। कारण यह है कि अभी जनता को सन्त रामपाल जी महाराज और उनके तत्वज्ञान के बारे में पूर्ण जानकारी नहीं है इस कारण वह अपने-अपने गुरुओं को ही पूर्ण सन्त मानकर पूज रहे है...और ऐसा आध्यात्मिक नियम भी है कि गुरु बनाने के बाद अपने गुरु में पूर्ण विश्वास रखे...इसी बात का सभी नकली सन्त महन्त धर्मगुरु फायदे उठाते है। जिस प्रकार शेर और गधे की पहचान उनकी बोली से होती है उसी प्रकार पूर्ण सन्त की पहचान उसकी बोली से अर्थात् उसके ज्ञान से होगी।
जब तक किसी व्यक्ति के पास पिछली सत साधना के फलस्वरूप पुण्य कर्म होते है तो वह वर्तमान में सत साधना ना करने पर भी पिछले पुण्यों का भोग भोगता है और वह सोचता है कि यह लाभ मुझे अपने गुरु द्वारा बतायी हुई साधना से मिला है लेकिन जब पिछले साधना वाले पुण्य समाप्त हो जाते है और पाप कर्म उदय होते है तब आपत्तियाँ आनी शुरु होती है तब उनके गुरु द्वारा बताई भक्ति से कोई बचाव नहीं हो पाता है...क्योंकि पापकर्म काटने वाली भक्ति(सतनाम व सारनाम) सिर्फ पूर्ण सन्त ही बता सकता है...अन्य सन्तों के पास यह विधि नहीं होती। पूर्ण सन्त ही अपने शिष्यों के पापकर्म काटकर उनके प्रारब्ध में आने वाले दुखो को दूर करता है और सुख व पूर्ण मोक्ष देता है। इसलिए पूर्ण सन्त की पहचान कर नाम उपदेश लेकर अपना कल्याण करवाओ।

सनातन धर्मियों सुनो कैसा है हमारा शाश्वत स्थान लोक अमरलोक कविराग्निः की कविर्गिर्भी में अर्थात अमरलोक कबीर परमेश्वर की वाणी मे

सनातन धर्मियों सुनो कैसा है हमारा शाश्वत स्थान लोक अमरलोक कविराग्निः की कविर्गिर्भी में अर्थात अमरलोक कबीर परमेश्वर की वाणी मे

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चल देखो देश हमारा रे, जहाँ कोटि पदम उजियारा रे, 🏃
🏃 देखो देश हमारा रे,जहाँ उजल भँवर गुंजारा रे, 🏃
चल देखो देश हमारा रे, जहाँ चवंर सुहगंम डारा रे, 🏃
चल देखो देश हमारा रे, जहाँ चन्द्र सूरज नहीं तारा रे, 🏃
चल देखो देश हमारा रे, नहीं धर अम्बर कैनारा रे,🌎 🏃
चल देखो देश हमारा रे, जहाँ अनन्त फूल गुलजारा रे, 🏃
चल देखो देश हमारा रे, जहाँ भाटी चवै कलारा रे, 🏃
चल देखो देश हमारा रे, जहाँ धूमत है मतवारा रे,🚁 
रे मन कीजै दारमदारा रे तुझे ले छोडूं दरबारा रे,
फिर वापिस ना ही आवे रे सतगुरु सब नाँच मिटावै रे, 🏃
चल अजब नगर विश्रामा रे, तुम छोड़ो देना बाना रे, 🏃
चल देखो देश अमानी रे, जहाँ कुछ पावक ना पानीरे,🚣 🏃
चल देखो देश अमानी रे, जहाँ झलकै बारा बानी रे, 🏃
चल अक्षर धाम चलाऊं रे, मैं अवगत पंथ लखाऊं रे,
कर मकरतार पियाना रे, क्यों शब्दै शब्द समाना रे,🌞 🌳
जहाँ झिलझिल दरिया नागर रे, जहाँ हंस रहे सुखसागर रे, जहाँ अनहद नाद बजन्ता रे, जहाँ कुछ आदि नहीं अन्ता रे,💥 🌿जहाँ अजब हिरम्बर हीरा रे,त जहाँ हंस रहे सुख तीरा रे, 🌲जहाँ अजब हिरम्बर हीरा रे, जहाँ यम दण्ड नहीं दुख पीडा रे ..आदरणीय गरीब दासजी महाराज परमेश्वर कबीर साहिब जी को सतलोक में आँखों देख कर बता रहे हैं 
🏃चल देखो देश अमानी रे मैं तो सतगुरु पर कुर्बानी रे, 🏃चल देखो देश बिलन्दा रे, जहाँ बसे कबीरा जिन्दा रे,🌳 🏃चल देखो देश अगाहा रे, जहाँ बसे कबीर जुलाहा रे🏤 🏃चल देखो देश अमोली रे, जहाँ बसे कबीरा कोली रे 🏃
चल देखो देश अमाना रे, जहाँ बुने कबीरा ताना रे,🏇 🏃
चल अवगत नगर निबासा रे, जहाँ नहीं मन माया का बासा रे 🏃चल देखो देश अगाहा रे, जह बसै कबीर जुलाहा रे.. .
हे मालिक आपके चरणों में कोटि कोटि दण्डवत् प्रमाण, ऐसा निर्मल ग्यान देने के लिए...
ऐसा निर्मल ग्यान है जो निर्मल करे शरीर,
और ग्यान मण्डलीक कहै ये चकवै ग्यान कबीर। 
और ग्यान सब ग्यानडी कबीर ग्यान सो ग्यान,
जैसे गोला तोब का अब करता चलै मैदान।
और संत सब कूप है, केते झरिया नीर,
दादू अगम अपार है ये दरिया सत् कबीर
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अवश्य पढे - पर्भु प्रेमी आत्माऐ परदेश (काललोक) से स्वदेश (अमरलोक) लौटने की सडक (विधि)

अवश्य पढे = पर्भु प्रेमी आत्माऐ
परदेश (काललोक) से स्वदेश (अमरलोक) लौटने की सडक (विधि)

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घीसादास जी कहते है मूल कमल से सीधी सडक जात है सतनाम(ओम + तत) ले जा उडा कर...
जैसे हमे अपने घर से दूसरे देश जाना हो तो पहले बस या कार से by सडक airport जायेगे उसके बाद हम बस कार से नही जा सकते फिर हमे airport से हवाई जहाज से उडकर जाना पडेगा..
ठीक इसी तरह मूल कमल से त्रिकुटी तक सीधी सडक जाती है गुरू जी का प्रथम मंत्र समझो बस कार जो हमे त्रिकुटी तक लेकर जायेगा.. त्रिकुटी हवाई अडडा समझो.. त्रिकुटी से आगे हमे सतनाम का मंत्र उडाकर लेकर जायेगा.. सतनाम के दो अक्षर को हवाई जहाज समझो.. ( नाम की नौका ही भवसागर से पार करती है)
विशेष जानकारी->
नोट - हमारा शरीर एक ब्रह्मांड का नक्शा है जो कुछ एक ब्रह्मांड मे है वो हम शरीर मे भी देख सकते है जैसे internet पर आप कुछ भी देख सकते हो इसी तरह परमात्मा की पावर से हम ब्रह्मांड को इस शरीर मे देख सकते है संत कमल बोलते है योगी चक्र बोलते है ये कमल चक्र इन देवताओ के आवास स्थल है जहा ये रहते है ये ब्रह्मांड मे ही है ये समझ लो हमारा शरीर मिनी ब्रह्मांड है ये देवता कमल के अन्दर हमारे शरीर मे भी विधमान है..
विस्तार से - संत रामपाल जी महाराज के तीन बार मे नामदान देते है प्रथम नाम , दूसरा नाम, तीसरा नाम (सारनाम)... अब जानिये तीनो मंत्रो का महत्व
प्रथम नाम का महत्व======
ये ब्रह्मांड सात कमलो(चक्रो) मे बांटा हुआ है और हर कमल मे एक एक देवी देवता को प्रधान बना रखा है..
मूल कमल --------
मूल कमल से सीधी सडक त्रिकुटी तक जाती है.. जब साधक की भक्ति पूरी हो जाती है तो कबीर परमेश्वर एक विमान लेकर गुरू रूप मे आते है..
(नोट - हमारी आत्मा पर पांच शरीर चढे हुए है स्थूल, सूक्ष्म ,कारण, महाकारण, कैवल्य शरीर..)
हम 5 तत्व के स्थूल शरीर को छोडकर सूक्षम शरीर मे आ जाते है तब हमारा विमान पहले मूल कमल से गुजरता है वहा गणेश जी विधमान है हम गंणेश के मंत्र की कमाई उनको देकर उनके कर्ज से मुक्त हो जायेगे..
फिर गंणेश जी हमे आगे जाने की अनुमति देगे...
स्वाद कमल------
फिर हम स्वाद कमल मे प्रवेश कर जायेगे यहा के प्रधान ब्रह्मा और सवित्री है.. हम ब्रह्मा सवित्री के मंत्र की कमाई इनको देकर कर्ज चुका देगे.. क्योकि ब्रह्मा हमारी उत्पति कर्ता है.. इसके बाद ब्रह्मा जी हमे आगे जाने की अनुमति हमे देगे..
नाभी कमल------
फिर हम नाभी कमल मे प्रवेश कर जायेगे नाभी कमल मे विष्णु लक्ष्मी प्रधान है हम इनके मंत्र की कमाई इनको देकर कर्ज चुका देगे.. क्योकि विष्णु पालन पोषण कर्ता है. फिर विष्णु जी हमारे विमान को आगे जाने की अनुमति देगे..
हदय कमल-----
फिर हम हदय कमल मे प्रवेश कर जायेगे. यहा के प्रधान शिव पार्वती है इनके मंत्र की कमाई इनको देकर इनका कर्ज चुका देगे.. क्योकि शिव संहार करते है.. फिर शिव हमारे विमान को आगे जाने की अनुमति द्गे.
कंठ कमल-----
फिर हम कंठ कमल मे प्रवेश कर जायेगे.. यहा की प्रधान दुर्गा माता है हम दुर्गा माता के मंत्र की कमाई दुर्गा माता को देकर इसका कर्ज चुका देगे.. फिर दुर्गा माता हमे आगे जाने की अनुमति देगी..
त्रिकुटी कमल-----
फिर हम त्रिकुटी कमल दसवे द्वार मे प्रवेश कर जायेगे... दसवे द्वार मे आगे चलकर त्रिवेणी आती है.. तीन रास्ते हो जाते है.. ये हवाई अडडा समझो प्रथम मंत्र हमे यहा तक लाकर छोड देते है. इससे आगे सतनाम के दो अक्षर उडाकर लेकर जाते है..
दूसरा नाम( सतनाम) का महत्व
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त्रिकुटी मे आगे चलकर तीन रास्ते हो जाते है जिसे त्रिवेणी बोलते है.. वहा काल के पुजारी दायं बाय चले जाते है.. लेकिन सामने जो रास्ता होता है उसको ब्रह्मरंद( बज्रकपाट) बोलते है.. वह अमरलोक जाने का रास्ता है.. कबीर परमात्मा कहते है शिव ने भी 97 बार try किया था.. लेकिन वो भी इस गेट को नही खोल पाये थे.. वो भी उल्टे हट गये थे क्योकि शिव के पास सतनाम मंत्र नही है..
गरीब- ब्रह्मरंद को खोलत है कोई एक
द्वारे से फिर जात है ऐसे बहुत अनेक
इस ब्रह्मरंद के बज्रकपाट को सतनाम के दो अक्षर खोलते है तब हम दसवे द्वार मे आगे सहंसार कमल मे प्रवेश करते है.. (यहा से ब्रह्मा विष्णु शिव के पिता काल की सीमा शुरू होती है.. जहा पर काल अपने भयानक वास्तविक रूप मे बैठा है) आगे बहुत भयानक आवाजे आती है डाकनी शाकनी बहुत सारी मिलती है.. सतनाम के मंत्र को सुनकर सब भाग जाते है.. (सतनाम मे इतनी पावर है अगर 12 करोड यम के दूत और साथ मे ब्रह्मा विष्णु शिव का पिता काल ये सभी एक साथ आ जाये मात्र एक जाप सबको उठाकर फैक देगा) आगे चलकर काल अपने वास्तविक रूप मे बैठा नजर आता है लेकिन गुरू रूप मे परमात्मा साथ होते है.. तब हमे तीनो मंत्रो का जाप एक साथ करना होता है..
तीसरे नाम (सारनाम) का महत्व
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(सतनाम के बाद जब हम तीसरा सारनाम गुरू जी से लेते है तो गुरू जी सतनाम के दो अक्षर मे ही सारनाम का एक अक्षर एड कर देते है ऐसे ब्रह्म परब्रह्म पूर्णब्रह्म तीनो का जाप एक साथ करना होता है.. जाप विधि गुरू जी बताते है गीता अध्याय 17 के 23 मे लिखा है ओम- तत- सत ये पूर्ण परमात्मा का मंत्र(नाम) कहा है ओम सीधा ही है तत सत कोड वर्ड है सतगुरू रामपाल जी महाराज बतायेगे.. फिर इन तीनो मंत्र का एक साथ जाप करना होता है सतनाम और सारनाम एक नाम बन जाता है)
जब हम दसवे द्वार के last मे जाते है तो वहा काल वास्तविक रूप मे बैठा है.. वहा हम जब इन तीनो मंत्रो (सतनाम और सारनाम)का जाप एक साथ करते है तो काल निरंजन सर झुका देता है गीता 8/13 श्लोक मे ओम मंत्र काल ब्रह्म का है इसकी कमाई काल अपने पास रख लेता है और हमे आगे आठवे कमल ग्यारहवे द्वार मे जाने की अनुमति दे देता है. इसके सर के पीछे ग्यारहवा द्वार है. जब काल सर झुकाता है तो हम इसके सर पर पैर रख कर ग्यारहवे द्वार परब्रह्म के लोक आठवे कमल मे प्रवेश कर जाते है वहा हमारा सूक्ष्म शरीर छुट जाता है हमारे पास तत और सत मंत्र की कमाई शेष रह जाती है जब हम परब्रह्म(अक्षरपुरूष) के लोक मे आगे बढते जाते है हमारी तत मंत्र की कमाई परब्रह्म रख लेता है क्योकि तत मंत्र परब्रह्म का है और हमे आगे जाने की अनुमति दे देता है. हमारे कारण महाकारण शरीर छुट जाते है केवल कैवल्य शरीर शेष रह जाता है (नौवे कमल मे बारहरवा द्वार पार करके अमरलोक है) ग्यारहवा द्वार के last मे भव्वर गुफा आती है वहा पर मानसरोवर बना है वहा से अमरलोक दिखाई देने लगता है वहा परमात्मा इस आत्मा को मानसरोवर मे स्नान करवाते है तब इस आत्मा का कैवल्य शरीर छुट जाता है और वास्तविक नूरी रूप बन जाता है तब वहा इस आत्मा के शरीर का प्रकाश सोलह सुरज और चंद्रमा जितना हो जाता है.. फिर सत मतलब सारनाम मंत्र की कमाई लेकर ये आत्मा सतलोक मतलब अमरलोक मे प्रवेश कर जाती है.. वहा सदा के लिए स्थाई हो जाती है.. मौज मनाती है नाचती गाती है परमात्मा कबीर साहेब के रोज दर्शन करती है.. इस तरह से ये आत्मा काल के जाल से निकलकर अपने घर अपने वतन अमरलोक लौट आती है.. फिर कभी काल के लोक मे वापिस नही आती.. सदा के लिए अमर और स्थाई हो जाती है.. सदा के लिए जन्म मरन से पीछा छुट जाता है.. फोटो मे लिखी कबीर सागर की अमरलोक की कबीर वाणी पढिये.. वहा जन्म मरण बुढापा नही होता सदा युवा रहती है आत्मा.. अमरलोक मे भी नर नारी है परिवार है. लेकिन शब्द शक्ति से बच्चे पैदा होते है गर्भ से नही होते.. वहा कोई कर्म नही करना पडता.. अमरलोक मे बाग बगीचे है फल फूल नदी मानसरोवर है लेकिन सब कुछ नूरी है हिरे की तरह स्वय प्रकासित.. वहा सभी प्रेम से रहते है.. कोई किसी को जरा भी बुरा नही बोलता..
सत साहेब जैसा इस दास ने गुरू जी के ज्ञान को समझा वैसा बता दिया कोई गलती हो तो गुरू जी क्षमा करना.. अज्ञानी जीव हु..
अमरलोक कबीर परमेश्वर की वाणी मे
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चल देखो देश हमारा रे, जहाँ कोटि पदम उजियारा रे, 🏃
🏃 देखो देश हमारा रे,जहाँ उजल भँवर गुंजारा रे, 🏃
चल देखो देश हमारा रे, जहाँ चवंर सुहगंम डारा रे, 🏃
चल देखो देश हमारा रे, जहाँ चन्द्र सूरज नहीं तारा रे, 🏃
चल देखो देश हमारा रे, नहीं धर अम्बर कैनारा रे,🌎 🏃
चल देखो देश हमारा रे, जहाँ अनन्त फूल गुलजारा रे, 🏃
चल देखो देश हमारा रे, जहाँ भाटी चवै कलारा रे, 🏃
चल देखो देश हमारा रे, जहाँ धूमत है मतवारा रे,🚁
रे मन कीजै दारमदारा रे तुझे ले छोडूं दरबारा रे,
फिर वापिस ना ही आवे रे सतगुरु सब नाँच मिटावै रे, 🏃
चल अजब नगर विश्रामा रे, तुम छोड़ो देना बाना रे, 🏃
चल देखो देश अमानी रे, जहाँ कुछ पावक ना पानीरे,🚣 🏃
चल देखो देश अमानी रे, जहाँ झलकै बारा बानी रे, 🏃
चल अक्षर धाम चलाऊं रे, मैं अवगत पंथ लखाऊं रे,
कर मकरतार पियाना रे, क्यों शब्दै शब्द समाना रे,🌞 🌳
जहाँ झिलझिल दरिया नागर रे, जहाँ हंस रहे सुखसागर रे, जहाँ अनहद नाद बजन्ता रे, जहाँ कुछ आदि नहीं अन्ता रे,💥 🌿जहाँ अजब हिरम्बर हीरा रे,त जहाँ हंस रहे सुख तीरा रे, 🌲जहाँ अजब हिरम्बर हीरा रे, जहाँ यम दण्ड नहीं दुख पीडा रे ..आदरणीय गरीब दासजी महाराज परमेश्वर कबीर साहिब जी को सतलोक में आँखों देख कर बता रहे हैं
🏃चल देखो देश अमानी रे मैं तो सतगुरु पर कुर्बानी रे, 🏃चल देखो देश बिलन्दा रे, जहाँ बसे कबीरा जिन्दा रे,🌳 🏃चल देखो देश अगाहा रे, जहाँ बसे कबीर जुलाहा रे🏤 🏃चल देखो देश अमोली रे, जहाँ बसे कबीरा कोली रे 🏃
चल देखो देश अमाना रे, जहाँ बुने कबीरा ताना रे,🏇 🏃
चल अवगत नगर निबासा रे, जहाँ नहीं मन माया का बासा रे 🏃चल देखो देश अगाहा रे, जह बसै कबीर जुलाहा रे.. .
हे मालिक आपके चरणों में कोटि कोटि दण्डवत् प्रमाण, ऐसा निर्मल ग्यान देने के लिए...
ऐसा निर्मल ग्यान है जो निर्मल करे शरीर,
और ग्यान मण्डलीक कहै ये चकवै ग्यान कबीर।
और ग्यान सब ग्यानडी कबीर ग्यान सो ग्यान,
जैसे गोला तोब का अब करता चलै मैदान।
और संत सब कूप है, केते झरिया नीर,
दादू अगम अपार है ये दरिया सत् कबीर
Plz visit - www.jagatgururampalji.org

हम कब सुधरेंगे जी

हम कब सुधरेंगे जी



ये अन्धविश्वास,पाखंड,ढोंग नही तो और क्या है ?
गर्भ धारण व शिशु पैदा होने का कोई मूहुर्त नही....

मृत्यु का कोई मुहूर्त नही ., क्योंकि ये बातें प्राकृतिक है।
विद्यालय मे प्रवेश ,परीक्षा मे प्रवेश , नौकरी हेतु इंटरव्यू, नौकरी की ज्वाइनिंग ,वेतन पाने इत्यादि का कोई मुहूर्त नही , पहले से तिथि निर्धारित होती है . और अंधभक्त इसके लिए मुहूर्त ढूंढते भी नहीं ...
फिर नामकरण ,शादी ,मकान हेतु भूमि पूजन ,गृह प्रवेश , मृत्यु भोज (terahi) इत्यादि कर्म कान्ड मे मुहूर्त कैसे घुस गया ???
जाहिर है धूर्त , बेइमान लोगो ने अपने निहित स्वार्थ हेतु समाज को गुमराह किया व उनके दिमाग को खराब किया
"मुहूर्त "एक कूटरचित शब्द है ,इस को रचने वालो पोगे पंथियो का बहिष्कार होना चाहिए जी । और इन दकियानुषि कुरीतियों का विरोध । निचे लिखे लिंक पर क्लिक करो जी और अपने मित्रों को इस ग्रुप में एड करो जी भगत और जगत सभी को करो जीwww.facebook.com/groups/arya.nareshdas/ परमेश्वर के आने से पहले "फॉलोवर ऑफ़ जगतगुरु रामपाल जी " ग्रुप में लाखों फॉलोवर होने चाहिए जी ।अभी तक मात्र 32000 हैं जी इसलिए अधिक से अधिक एड करें जी ताकि निर्मल और श्रेष्ट समाज के मिशन में आपकी भी आहुति डले और आप भी पूण्य के भागी हों जी 🙏जयबन्दीछोड़की🙏

गुरुनानक देव जी का सन्देश 1

गुरुनानक देव जी का सन्देश 

गुरु ग्रन्थ साहिब के राग ‘‘सिरी‘‘ महला 1 पृष्ठ नं. 24 पर शब्द नं. 29शब्द -
एक सुआन दुई सुआनी नाल, भलके भौंकही सदा बिआल
कुड़ छुरा मुठा मुरदार, धाणक रूप रहा करतार।।1।।
मै पति की पंदि न करनी की कार। उह बिगड़ै रूप रहा बिकराल।।
तेरा एक नाम तारे संसार, मैं ऐहो आस एहो आधार।
मुख निंदा आखा दिन रात, पर घर जोही नीच मनाति।।
काम क्रोध तन वसह चंडाल, धाणक रूप रहा करतार।।2।।
फाही सुरत मलूकी वेस, उह ठगवाड़ा ठगी देस।।
खरा सिआणां बहुता भार, धाणक रूप रहा करतार।।3।।
मैं कीता न जाता हरामखोर, उह किआ मुह देसा दुष्ट चोर।
नानक नीच कह बिचार, धाणक रूप रहा करतार।।4।।
इसमें स्पष्ट लिखा है कि एक(मन रूपी) कुत्ता तथा इसके साथ दो (आशा-तृष्णा रूपी) कुतिया अनावश्यक भौंकती(उमंग उठती) रहती हैं तथा सदा नई-नई आशाएँ उत्पन्न(ब्याती हैं) होती हैं। इनको मारने का तरीका(जो सत्यनाम तथा तत्व ज्ञानबिना) झुठा(कुड़) साधन(मुठ मुरदार) था। मुझे धाणक के रूप में हक्का कबीर (सत कबीर) परमात्मा मिला। उन्होनें मुझे वास्तविक उपासना बताई।नानक जी ने कहा कि उस परमेश्वर(कबीर साहेब) की साधना बिना न तो पति(साख) रहनी थी और न ही कोई अच्छी करनी(भक्ति की कमाई) बन रही थी। जिससे काल का भयंकर रूप जो अब महसूस हुआ है उससे केवल कबीर साहेब तेरा एक(सत्यनाम) नाम पूर्ण संसार कोपार(काल लोक से निकाल सकता है) कर सकता है। मुझे(नानक जी कहते हैं) भी एही एक तेरे नाम की आश है व यही नाम मेरा आधार है। पहले अनजाने में बहुत निंदा भी की होगी क्योंकि काम क्रोध इस तन में चंडाल रहते हैं।मुझे धाणक(जुलाहे का कार्य करने वाले कबीर साहेब) रूपी भगवान ने आकर सतमार्ग बताया तथा काल से छुटवाया। जिसकी सुरति(स्वरूप) बहुत प्यारी है मन को फंसाने वाली अर्थात् मन मोहिनी है तथा सुन्दर वेश-भूषा में(जिन्दा रूप में) मुझे मिलेउसको कोई नहीं पहचान सकता। जिसने काल को भी ठग लिया अर्थात् दिखाई देता है धाणक(जुलाहा) फिर बन गया जिन्दा। काल भगवान भी भ्रम में पड़ गया भगवान(पूर्णब्रह्म) नहीं हो सकता। इसी प्रकार परमेश्वर कबीर साहेब अपना वास्तविक अस्तित्व छुपा कर एक सेवक बन कर आते हैं। काल या आम व्यक्ति पहचान नहीं सकता। इसलिए नानक जी ने उसे प्यार में ठगवाड़ा कहा है और साथ में कहा है किवह धाणक(जुलाहा कबीर) बहुत समझदार है। दिखाई देता है कुछ परन्तु है बहुत महिमा(बहुता भार) वाला जो धाणक जुलाहा रूप मंे स्वयं परमात्मा पूर्ण ब्रह्म(सतपुरुष) आया है। प्रत्येक जीव को आधीनी समझाने के लिए अपनी भूल को स्वीकार करते हुए कि मैंने(नानक जी ने) पूर्णब्रह्म के साथ बहस(वाद-विवाद) की तथा उन्होनें (कबीर साहेब ने) अपने आपको भी (एक लीला करके) सेवक रूप में दर्शनदे कर तथा(नानक जी को) मुझको स्वामी नाम से सम्बोधित किया। इसलिए उनकी महानता तथा अपनी नादानी का पश्चाताप करते हुए श्री नानक जी ने कहा कि मैं(नानक जी) कुछ करने कराने योग्य नहीं था। फिर भी अपनी साधना को उत्तम मान कर भगवान से सम्मुख हुआ(ज्ञान संवाद किया)। मेरे जैसा नीच दुष्ट, हरामखोर कौन हो सकता है जोअपने मालिक पूर्ण परमात्मा धाणक रूप(जुलाहा रूप में आए करतार कबीर साहेब) को नहीं पहचान पाया? श्री नानक जी कहते हैं कि यह सब मैं पूर्ण सोच समझ से कह रहाहूँ कि परमात्मा यही धाणक (जुलाहा कबीर) रूप में है।
भावार्थ:- श्री नानक साहेब जी कह रहे हैं कि यह फासने वाली अर्थात् मनमोहिनी शक्ल सूरत में तथा जिस देश में जाता है वैसा ही वेश बना लेता है, जैसे जिंदा महात्मा रूप में बेई नदी पर मिले, सतलोक में पूर्ण परमात्मा वाले वेश में तथा यहाँ उतर प्रदेश में धाणक(जुलाहे) रूप में स्वयं करतार (पूर्ण प्रभु) विराजमानहै। आपसी वार्ता के दौरान हुई नोक-झोंक को याद करके क्षमा याचना करते हुए अधिक भाव से कह रहे हैं कि मैं अ byपने सत्भाव से कह रहा हूँ कि यही धाणक(जुलाहे) रूप में सत्पुरुष अर्थात् अकाल मूर्त ही है।





शुक्रवार, 20 मई 2016

झूठी शानो शौकत मानव सभ्यता पर कलंक

सत् साहेब।।
सभी भाई बहनो, बुजुर्गो व् माताओ से प्रार्थना है इस सन्देश को ध्यान से पढ़े व् परमात्मा की दी हुई बुद्दी से विचार करे की आज हम व्यर्थ की परम्पराओ में, लोकलाज में, व् समाज को दिखाने की झूठी शानो शौकत में इतने उलझ चुके है की आज हमें ना चाहते हुए भी विवाह शादी में इतने सारे फिजूल के खर्चे करने पड़ते है ताकि कल को हमें कोई ताने ना मारे,
लेकिन हम तत्त्वज्ञान व् परमात्मा की दी हुई बुद्दी से सोचेंगे तो पाएंगे की, शादी में फिजूल खर्च जैसे, घोड़ी,बैंड बाजा,कई तरह की मीठी व् चटपटी रसोई, भात, मेल, तिलक, टिका, लगन, आदि अनेको ऐसी परम्पराये है जिनका हमारे प्रमाणित सद्ग्रंथो पवित्र गीता जी, व् वेदों में कही भी कोई जिक्र नहीं है।
विचार करने की बात है। जब ब्रह्मा विष्णु महेश जी की शादी हुई तब उसमे नाही तो कोई बैंड बजाने वाला था, नाही कोई रसोई बनाई गई थी, नाही कोई भात भरने वाला था, नाही कोई बाराती थे। सागर मंथन में तीन कन्याए सावित्री, लक्ष्मी व् उमा निकली और तीनो देवताओ की माता दुर्गा जी ने ब्रह्मा जी को सावित्री, विष्णु जी को लक्ष्मी व् शंकर जी को उमा देकर कहा, बेटा जावो और अपना घर बसाओ।
यहाँ विचार करने की बात है क्या आज हम तीनो देवताओ ब्रह्मा विष्णु महेश जी से भी बड़े हो गए है जो इतनी सारी परम्पराओ में उलझकर बेटी को अपनी दुश्मन बना लिया है इस परम्पराओ के चक्कर में बेटी का होना भी दुःख मान लिया है जबकि बेटी साक्षात् लक्ष्मी का रूप होती है
सतयुग में ऐसा कोई भी आडम्बर नहीं हुआ करता था। लेकिन समय के साथ साथ कुछ धनवान लोगो व् राजाओ ने अपनी मान बड़ाई व् दिखावे के चक्कर में ये सब करना शुरू कर दिया अब कोई गरीब की बेटी जब उन धनवानों की शादी में जाती और देखती की उसके पिता ने उसकी शादी में इतने सुन्दर सुन्दर बेस दिए है इतने महंगे गहने दिए है इतना सामान दिया है और साथ में काफी पैसे भी दिए है, ये सब देखकर उस गरीब की लड़की की भी इच्छा होती थी की मेरी शादी में भी मेरा पिता मुझे वही सब कुछ दे जो उस धनवान पिता ने अपनी पुत्री को दिया है।
जब गरीब की लड़की शादी के लायक होती थी तो उस गरीब को चिंता सताने लग जाती थी की यदि मैंने भी अपनी बेटी की शादी में थोडा बहुत उस धनवान पिता की पुत्री जैसा नहीं किया तो मेरी बेटी की आत्मा बहुत दुखी होगी, ऐसा सोचकर वह गरीब आदमी, की कही मेरी बेटी की आत्मा दुखी ना हो उसने किसी से कर्जा लेना शुरू कर दिया या अपनी जमीन जायदाद सेठ साहूकारों के यहाँ गिरवी रखने लग गए, और उन साहूकारों का पैसा चुकाने के चक्कर में दिन रात चिंतित रहता और पैसा नहीं चुकाने पर उसे अपनी जमीन अंत में बेचनी पड़ती थी। धीरे धीरे आगे चलकर विवाह शादी में इतना खर्चा व् लोक दिखावा करना एक परंपरा बन गई जो आज एक आम व् गरीब आदमी के लिए जी का जंजाल बन गई है।
आज संत रामपाल जी महाराज जी के तत्त्वज्ञान की रौशनी में पता चला की ये सब कर्म काण्ड कभी पैसे वाले लोगो ने दिखावे के लिए शुरू किये थे जिस कारन आज ये परम्पराये बन गई है और अंदर ही अंदर समाज को खोखला कर दिया है आज जिस पिता के 2, 4 बेटियां है उनकी परवरिश व् आगे चलकर शादी की चिंता में वह रात दिन चिंतित रहता है।
लेकिन आज हम सब शिक्षित है और संत रामपाल जी महाराज के प्रवचन सुनकर सब समझ में आ चुका है की ये सभी व्यर्थ की परम्पराये एक हँसते खेलते परिवार में जहर घोल रही है
आज यहाँ आप सभी के सामने परम संत सद्गुरु रामपाल जी महाराज जी के आशिर्वाद से मात्र 16 मिनट में साधारण तरीके से इन दोनों बच्चों की रमैनी सम्पन्न होने जा रही है। जिसमे नाही कोई भाती होंगे, नाही बाराती होंगे ना घोड़ी ना बैंड बाजे होंगे, नाही कोई लेन देन (दहेज) होगा और नाही कोई 56 भोग होंगे केवल सादा भंडारा ( सब्जी पूरी ) होगा।
संत रामपाल जी महाराज के आशीर्वाद से इस तरह की शादिया आने वाली पीढ़ियों के लिए वरदान साबित होंगी, पिता अपनी पुत्री की शादी में दहेज देने की चिंता छोड़कर उसे अच्छी शिक्षा दिया करेगा जिससे दो परिवारो का भला होगा।
आज बिना ज्ञान के दहेज के चक्कर में बेटियो को जिन्दा जला दिया जाता है उन्हें घर से बाहर निकाल दिया जाता है तरह तरह की घोर यातनाये ससुराल वालो की तरफ से दी जाती है ये सब बंद होगी। यदि लड़की ससुराल में सुखी रहेगी तो लड़की के माता पिता भी सुखी रहेंगे।
पढ़ी लिखी लड़की अपने बच्चों को भी शिक्षित व् संस्कारी बनाएगी, जिससे एक परिवार सुधरेगा, एक परिवार से धीरे धीरे समाज सुधरेगा फिर समाज से एक दिन देश सुधरेगा, और उन व्यक्तियों के नाम इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरो में लिखे जायेंगे जो आज इस शुरुआत में अपना योगदान दे रहे है।
विचार करे जिस गरीब बाप के 5 लडकिया है पहले तो उन 5 लड़कियो की शादी करने के लिए कर्जा लेकर सारी जिंदगी वो बाप परेशान रहता है बाप के मरने के बाद उन 5 लड़कियो के भात छूछक व् अन्य परम्पराओ में उनका भाई सारी जिंदगी परेशान रहता है। और कर्जा ले लेकर अपनी सात पीढ़ियों को परेशानी में डाल जाते है।
आज तो सरकार ने भी इन व्यर्थ की परम्पराओ से निजात दिलाने के लिए कोर्ट मैरिज शुरू कर दी है जिसमे लड़का लड़की के अलावा दो गवाह होते है इसके अलावा ना घोड़ी ना बाजा ना भाती ना बाराती और नाही समाज का दुश्मन दहेज कुछ भी नहीं होता है।
आप सभी समाज के शिक्षित भाई बहनो व् बुजर्गो से पुन हाथ जोड़कर निवेदन है अपने बच्चों के सुखद जीवन व् सफल विवाह के लिए किसी समय अपनी शानो शौकत व् मान बड़ाई के लिए उन धनवानों के द्वारा समाज में चलाई गई इन फिजूल की कुरूतियों से बाहर निकल कर आज रमैनी जैसे आदर्श विवाह को अपनाकर अपने बच्चों के भविष्य में खुशियो के बीज बोये।
आज कहने की जरुरत नहीं है आप स्वयं अपनी अंतरात्मा से सोचे की आपने अपने बच्चों की शादियों में कितना पैसा पानी की तरह व्यर्थ बहाकर आज कर्जे की आफत मोल लिए बैठे है और मांगने वालो के दस ताने सुनने पड़ते है।
आपजियो से निवेदन है परम संत सद्गुरु रामपाल जी महाराज के सत्संग सुनिए उनपर कुछ विचार अमल कीजिये और उनसे नाम उपदेश लेकर अर्थात सतभक्ति अपनाकर इन सभी दुखो से निजात पाइए।
सत् साहेब।।

सोमवार, 16 मई 2016

देश की बर्बादी के मुख्य कारक

भ्रष्ट न्यायधीश- बकील -पत्रकार, राजनेता, मंत्री , सरकारी अफसर , इस सबने देश को कर दिया है बर्वाद ,,, इनको ढूंढ ढूंढ कर देश से बहार निकाल फेको ,,जैसे एक किसान अपनी फसल से खरपतवार को निकल फ़ेंकता है ... तभी उसकी फसल अच्छी होती है ... देखिये इन लिंक पर  इनके गठ्जोड की  सच्ची शर्मनाक दास्ताँ  http://www.rsss.co.in

विश्व के सभी सच्चे अच्छे लोगो का आह्वान करता हु की वो सभी विश्व के महापरिवर्तन के महानायक महासंत परमेश्वर कवीर के अवतार रामपाल जी के साथ जुड़े ... ये विश्व के एकमात्र ऐसे संत है जिन्होंने उपरोक्त भ्रष्टो के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है ,,,इन्होने ही पुस्तके लिखी भ्रष्ट जज कुमार्ग पर और न्यायालय की गिरती गरिमा जिसमे प्रमाणों के साथ जजों के नाम और उनकी कारस्तानिया लिखी हुयी है, इन भ्रष्टो के एक साथ मिलकर योजनास्वरुप संत रामपाल जी और उनके मिशन को ख़तम कारने के लिए क़ानून को ताक पर राख कर बरवाला काण्ड कर दिया और मिडिया द्वारा बदनाम करने की कुचेष्टा की , हे बिश्व के सच्चे अच्छे सच्चाई पसंद मानव आप स्वयं चेक करो इस परम संत रामपाल जी के विचार उनके मिसन को ....अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट -http://www.rsss.co.in और www.jagatgururampaljimaharaj.org  पर खोजे .. इन परम संत के विषय में अनेको भविष्यबक्ताओ ने भविष्यवानिया की है की वो परम संत उत्तर भारत में है जो कलयुग में सतयुग लायेगा .... आप इसके प्रमाण देख सकते हो वर्तमान में जो भी इस समय इनके अनुयायी है वो सभी बुराईयों से दूर रहकर परमेश्वर की भक्ति करते है और सदा जीवन उच्चविचार का जीवन जी रहे है ... हजारो  नशेड़ियो ने नशा त्याग दिया इन परम संत के सानिद्ध्य में आकर ... बिना दहेज लिए दिए सादे समारोह में रोज अनेको शादिया होती है इनके बनाये समाज में .  हे बुद्धिमानो समय का सदुपयोग करो इन परम संत को जानने के लिए ..क्युकी जो कुछ भी मिडिया द्वारा  फैलाया गया है वो  निरा झूट भ्रम है , भ्रष्टाचारियो का जाल है ... आप को खुद ही कष्ट उठाना होगा सच्चाई को जानने के लिए  ...  {सत साहेब }

मंगलवार, 3 मई 2016

breaking news 2016 - जय गुरुदेव पन्थ के हजारो भगत ले चुके हैं अन्न त्याग का दृढ़ संकल्प - क्यों ???

जय गुरुदेव पन्थ के हजारो भगत ले चुके हैं अन्न त्याग का दृढ़ संकल्प।



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जय गुरु देव पंथ के मुखी बाबा तुलसी दास साहेब ने जब से इस बात की भविष्यवाणी की कि वह सन्त जिसकी अध्यक्षता मे सतयुग जैसा माहौल कलयुग मे आयेगा उसका जन्म हो चुका है। तब से जयगुरुदेव पंथ के अधिकांश अनुयायी उस सन्त की खोज मे रात दिन लगे रहते है।

आपको यह जानकर आश्चर्य भले ही हो पर यह सत्य है। जय गुरुदेव पंथ के हजारों भगतो ने उस सन्त की खोज के पूरे होने तक अन्न का त्याग कर रखा है।

बाबा जय गुरु देव के समर्थको द्वारा बार बार यह प्रश्न किये जाने पर कि बाबा आप कहते रहते है सतयुग आयेगा कलयुग जायेगा पर अभी तक सतयुग जैसा माहौल उत्पन्न नही हुआ है अपितु घोर कलयुग आता जा रहा है तब स॔गत के बार बार आग्रह करने पर
बाबा जय गुरुदेव ने 7 सितम्बर 1971 को इस बहुचर्चित प्रश्न पर पटाक्षेप करते हुये उदघोषित किया कि उनकी अगुवाई मे सतयुग जैसा माहौल नही आयेगा अपितु वह सन्त कोई और है
बाबा जयगुरुदेव के मुख से ऐसा वक्तव्य सुनकर बाबा जयगुरुदेव के सभी अनुयायियों को विस्मय भरा घोर आश्चर्य हुआ ।तब उन सभी अनुयायियों ने उन सन्त के बारे मे और ज्यादा जानकारी जाननी चाही तब जयगुरुदेव ने 7 सितम्बर 1971 को बताया कि आज वह सन्त पूरे वीस वर्ष का हो चुका है।
जय गुरुदेव के उक्त वचन के अनुसार उस सन्त की जन्म तिथि 8 सितम्बर 1951 बनती है।क्योंकि 7 सितम्बर 1971 को उन सन्त जी ने पूरे 20 वर्ष पूर्ण किये थे।
जयगुरुदेव के जीवित रहते ही इस बिषय पर मन्थन शुरु हो गया था कि वह सन्त कौन है जिनकी जन्मतिथि 8 सितम्बर 1971 है।इसी क्रम मे बाबा जयगुरुदेव के कुछ 8 सितम्बर 1971 को जन्मे व कुछ 7 सितम्बर 1971 को जन्मे 11 अनुयायियों ने वह सन्त होने का दावा ठोंका जिसे बाबा जयगुरुदेव ने रिजेक्ट कर दिया था
उसके बाद अनेको भगत यह दावा ठोंकते रहे पर बाबा जयगुरुदेव ने सभी दावे निरस्त करते हुये यहाँ तक कह दिया था कि उनके शिष्यों मे कोई भी वह सन्त नही है।इसके बाद सन 1981 की गुरुपूर्णिमा पर भी बाबा जयगुरुदेव ने उन सन्त का पुनः जिक्र किया।और ठोंककर कर कहा कि वह सन्त 30 वर्ष का होने जा रहा है
इसके वाबजूद भी जयगुरुदेव पंथ के कई अनुयायियों ने अपने मत से अनेक सन्त मत चला रखे है ज्ञात हो कि बाबा जयगुरुदेव ने मृत्यु पर्यन्त किसी को भी अपना उत्तराधिकारी नही बनाया था।फिर भी बाबा जयगुरुदेव के अनेकानेक अनुयायियी साम दाम दन्ड भेद के सिद्धान्त की आड़ लेकर गुरुपद पर विराज मान हो गये है।
पर इसके ठीक विपरीत जयगुरुदेव पंथ के हजारों की संख्या मे अनुयायियों ने खुद को गुरुपद पर विराजित करने के स्थान पर उन परम सन्त की खोज मे अन्न का त्याग कर रखा है कि जिन सन्त की जन्म तिथि 8 सितम्बर 1951 है।
अब इनको कौन समझाये कि वह सन्त और कोई नही बल्कि सन्त रामपाल जी महाराज ही है।

उत्तरी भारत मे प्रकट हो चुका है वो संत. पूरे विश्व को एक और अज्ञान का करेगा अंत. भविष्य वक्ताओ की भविष्य वाणी

उत्तरी भारत मे प्रकट हो चुका है वो संत.
पूरे विश्व को एक और अज्ञान का करेगा अंत.

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जनिये भविष्य वक्ताओ की भविष्य वाणी
यहा सै मिला ले ~~~
https://superenergykundalini.wordpress.com/…/book-golden-l…/
पुस्तक 'एक नए युग की स्वर्ण प्रकाश' के साथ टैग
मैं स्पष्ट रूप से कल्पना कर सकते हैं एक स्वर्ण युग-परमात्मा द्रष्टा फ्लोरेन्स
"है कि मैं स्पष्ट रूप से देख सकते हैं उत्तर भारत के पवित्र क्षेत्र है जहां भयानक लगातार साधना में खुद को डुबो प्रयासों तरह के एक दैवीय आध्यात्मिक प्रवाह जो पूरी दुनिया में भविष्य में युग परिवर्तन में कायम करने में सक्षम हो जाएगा radiating है के साथ एक संत। उनकी आध्यात्मिक सोच तो क्रांतिकारी है कि एक के मन में लोगों तरीके गवाह जाएगा इसकी चिंगारी एक प्रज्वलन नरक है जो बदले में हर नुक्कड़ और दुनिया के कोने में फैल जाएगा में परिवर्तित हो रही boggled किया जाएगा। लोगों को एहसास करेगा कि केवल इस महान संत के शक्तिशाली, प्रगतिशील सोच है कि सभी दुनिया की समस्याओं troubleshoots imbibing में बसता है अच्छी तरह से पूरी दुनिया की जा रही है। इस तरह धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से लोग आध्यात्मिकता की ओर निर्देशित हो जाएगा और पूरी तरह से आध्यात्मिक गाया जा जाएगा। यह बदले में लोगों के अनुभव पृथ्वी पर स्वर्ग की खुशी "दुनिया भर में मदद करेगा।
इस घोषणा के फ्लोरेंस, कुछ दशक उसकी पुस्तक 'एक नए युग की गोल्डन लाइट' में वापस आ गया के बारे में न्यू जर्सी, संयुक्त राज्य अमेरिका के एक उच्च बौद्धिक शंकराचार्य द्वारा किया गया था। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में लिखते हैं कि:
जब मैं ध्यान के महान उड़ानों दर्ज करें मैं इस तरह के एक महान संत जो निष्पक्ष चमड़ी है, सफेद बालों के साथ और एक दाढ़ी / मूंछें बिना कल्पना। उसका चेहरा एक शानदार दिव्य आभा के साथ चमकता है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे कि इस महान संत, एक बेहद प्रतिभाशाली सूरज है कि अपने दिव्य आभा और ऊर्जा के साथ उज्ज्वल लौ दीपक के हजारों से घिरा हुआ है, के बीच बैठा न केवल पास आग की लपटों में जीवन imbues लेकिन लगता है कि पूरी दुनिया में अपने दिव्य प्रकाश किरणों के प्रसार के द्वारा enlightens यह। लोग चुंबकीय दिव्य प्रकाश है जो एक लौ दीपक की ओर मोहित तितलियों के समान है imbuing इस जीवन की ओर आकर्षित हो मजबूरन। इस प्रेरणादायक दिव्य प्रकाश दुनिया इंसानों के कारण एक परिणाम है जो इस तरह के एक विशाल सुपर क्रांति की शुरूआत होगी, जिसमें समकालीन दुनिया denizens द्वारा सोचा क्रांति के रूप में चिह्नित किया जाएगा के रूप में खुद के भीतर एक असाधारण परिवर्तन का अनुभव होगा।
इस क्रांति के कारण भौतिकवादी विश्वासों बदल जाएगा और अत्यधिक बुद्धिजीवियों में इस तरह के एक विचार चेतना विकसित करेगा कि शायद ही कुछ है, जबकि यह एक आध्यात्मिक सोचा प्रवाह बुला दृढ़ता से कहना होगा। इस नई सोच के उदय के कारण एक बार फिर से आध्यात्मिकता दुनिया भर में स्थापित कर रहे हैं मिल जाएगा। उस समय हर कोई एक धर्म के बारे में सोचना होगा और कहा कि एक दुनिया राष्ट्र की अवधारणा के साथ-साथ मानव धर्म है। पूरी दुनिया में आई तेजी जाएगा, इस महान संत के महान सोचा प्रवाह। विभिन्न धार्मिक के विभिन्न अनुयायियों को अपने सच्चे मार्गदर्शक के रूप में इस संत पर विचार करूँगा। मुसलमानों के बीच वह पैगंबर मोहम्मद के रूप में देखा जा जाएगा। ईसाई प्रभु यीशु मसीह का दूसरा रूप के रूप में उस पर लग रही है जबकि हिन्दुओं ने उस सर्वशक्तिमान ईश्वर के 10 वें अवतार फोन करेगा। उनकी ऊर्जा इतनी असाधारण होगा और मन में उसके लिए उड़ाने कि यह आसानी की बात दुनिया जनता की चेतना में नई प्रेरणा रंगना हो जाएगा और नियंत्रण में मदद करेगा / प्रकृति या स्वभाव की बिगड़ती संतुलन संतुलन। निर्दोष व्यवहार और उज्ज्वल दिव्य व्यक्तित्व की तरह अपने बच्चे के द्वारा और द्वारा संगठन की तरह एक विशाल सेना पैदा हो जाएगा और अपनी रचनात्मक सैनिकों संत पवित्र मिशन में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा इस तरह से खुद के लिए लोगों को आकर्षित मजबूरन जाएगा।
उपरोक्त के अलावा फ्लोरेंस बना दिया है कई अन्य भविष्यवाणी से, जिसमें मध्य-पूर्व एशिया, यूरोप और अमेरिका के देशों के शामिल किए गए हैं। इन भविष्यवाणियों के अधिकांश सच हो गया है, लेकिन वहाँ जो अभी तक साकार करने के लिए हैं, उनमें से कुछ कर रहे हैं। हमें उम्मीद करनी चाहिए कि भविष्य के दिनों में इन भविष्यवाणियों भी आने के लिए सत्य का परीक्षण पारित करेगा। इस संदर्भ के साथ वह एक और पुस्तक है जिसमें वह वर्ष 2000 और समय है कि आगे की चर्चा की है और लिखा है। उसकी bestselling पुस्तक 'एक सनसनीखेज संस्कृति के पतन' में फ्लोरेंस में इस तरह के कई भविष्यवाणी है कि समकालीन और प्रासंगिक हैं और इसलिए अगर हम उनके बारे में लिखने यह अप्रासंगिक नहीं है बना दिया है। उसे पुस्तकों में वह लिखते हैं कि साल के बाद दुनिया में इस तरह के भूकंप के कई हिस्सों में 1988-1989 ईस्वी प्रकट करेगा कि संपत्ति और जीवन का एक बड़ा सौदा खो दी जाएगी। सभी को देखने के लिए कि उत्तराखंड (उत्तर भारत) में इस तरह के एक भयानक भूकंप का उल्लेख किया गया था कि अब तक अधिकारियों कितना संपत्ति और जीवन खो गया था के रूप में कोई सुराग नहीं है यह वहाँ है। भूकंप उत्तरी बिहार (भारत) और नेपाल में 1000 से अधिक लोग मारे गए में देखा में अगस्त 1988 में इस से पहले। चीन में अक्टूबर 1990 और फरवरी 1991 में पाकिस्तान में भूकंप के लगभग 500 लोग मारे गए। एक लातूर और उस्मानाबाद (महाराष्ट्र, भारत) में भूकंप के कारण मानव और भौतिक नुकसान आया वर्णन करने के लिए असफल हो सकता है। यह साबित करता है कि फ्लोरेंस की भविष्यवाणी सच हो गया है।
ऐसा नहीं है कि फ्लोरेंस दोनों उसे पुस्तकों में फिर से और फिर कुछ स्थानों में उत्तर भारत के एक क्षेत्र है और इस तरह के एक वहाँ पैदा हुए संत जो निर्देशित करेंगे एक ऐसी दुनिया में सोचा क्रांति का उल्लेख किया गया है उल्लेखनीय है। फिर भी फ्लोरेंस न उत्तर भारत में इस जगह है और न ही उस महान संत का नाम दिया गया है। इस वार पाठकों के बावजूद यह कम से कम मुश्किल को साकार करने के लिए किसके ऊपर लाइनों के लिए alluded कर रहे हैं मिल जायेगा?
उपरोक्त के अलावा फ्लोरेंस बना दिया है कई अन्य भविष्यवाणी से, जिसमें मध्य-पूर्व एशिया, यूरोप और अमेरिका के देशों के शामिल किए गए हैं। इन भविष्यवाणियों के अधिकांश सच हो गया है, लेकिन वहाँ जो अभी तक साकार करने के लिए हैं, उनमें से कुछ कर रहे हैं। हमें उम्मीद करनी चाहिए कि भविष्य के दिनों में इन भविष्यवाणियों भी आने के लिए सत्य का परीक्षण पारित करेगा। इस संदर्भ के साथ वह एक और पुस्तक है जिसमें वह वर्ष 2000 और समय है कि आगे की चर्चा की है और लिखा है। उसकी bestselling पुस्तक 'एक सनसनीखेज संस्कृति के पतन' में वह लिखते हैं:
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चारों ओर वर्ष 2000 ईस्वी प्राकृतिक आपदाओं के इस तरह के दृश्य को देखकर भी देखा जा जाएगा, जो यह कहने के लिए कि क्या इस ग्रह सुरक्षित अभी तक बाद में लोगों के इस संदेह निरस्त किया जाएगा होगी मुश्किल हो जाएगा। वे सब के सब स्पष्ट है कि रचनात्मकता के इन भयभीत दुनिया स्थितियों क्षमता में छिपा झूठ बोल काम कर रहे हैं और सूरज पूरब यह इतना के रूप में अपनी दिव्य आभा दुनिया भर में प्रसार करने के लिए एक उज्ज्वल रूप ले जाएगा में बढ़ती करने के लिए इन सदृश देखेंगे। इसलिए उस समय स्थिति की तरह कोई अराजकता मौजूद जाएगा और वहाँ शांति हर जगह हो जाएगा। उच्च कम, अमीर-गरीब आदि की दीवार को प्रभावी ढंग से ढहा दी जाएगी और एक आध्यात्मिक दृष्टिकोण एकता / समानता के साथ बह अपने शिखर तक पहुंच जाएगा। लोग भाईचारे और सौहार्द के माहौल में जीना होगा। इनमें इस तरह की भावनाओं को पैदा करेगा कि एक विशाल दुनिया परिवार पैदा हो जाएगा। विश्व के इस परिवार में रहने वाले मनुष्य की आत्मा की एकता 'के सिद्धांतों को आत्मसात करेगा और' दुनिया को एक परिवार के रूप में शांति से एकजुट '। अभी तक इस सुनहरे दिन दुनिया इंसानों को देखने से पहले पीड़ा और दर्द के बारे में अपने नए पैदा हुए बच्चे को वितरित करने के लिए एक गर्भवती मां के सदृश से गुजरना पड़ेगा। के बाद ही दुनिया अच्छे भाग्य के इस अपने सूरज भोर शानदार ढंग से करेगा।
2000 ई से पहले दशकों की एक जोड़ी कठिनाइयों और तरह बदलती दुनिया की समस्याओं से भरे रहेंगे। लोग एक दूसरे को मारने के लिए भागते नहीं होंगे। अराजकता इसकी नादिर तक पहुँच जाएगा। हर जगह ईर्ष्या और नफरत राज करेगी। असंतोष इतनी चिंताजनक वृद्धि करेगा कि यह एक wriggling मछली पानी से निकाल तुलना में किया जा सकता है। इन भयानक बार लोगों में प्रचलित दूसरों को मारने के लिए और खुद भी मर जाएगा जंगल के कानूनों के आधार पर। नैतिकता और अखंडता नाली और उन शक्ति के साथ नीचे फेंक दिया जाएगा और, दूसरों की सही संपत्ति छीन जाएगा सकता है। पर्यावरण प्रदूषण आदमी के दागी बुद्धि का परिणाम है कि इस तरह की स्थितियों और उत्तेजित विश्व मानवता के तहत आग में ईंधन की तरह पैदा सामूहिक आत्महत्या का करारा पर खड़े करेगा। और अभी तक इस रचनात्मक क्षमता के साथ साथ के बाद भी काम है जो 21 वीं सदी की शुरुआत में आध्यात्मिक चेतना की एक लहर के सदृश उत्तर भारत से शुरू होगी पर होगा। इस तरह के विशाल गति है कि दुनिया खतरे के उन काले बादलों पहले से अब देखा एक भयानक चक्रवाती तूफान में घास की एक पत्ती के लिए समान नष्ट हो जाएगा इकट्ठा करेंगे। लोग विश्व एकता / समानता के महत्व का एहसास होगा और इसलिए दुनिया भर में भाईचारे की भावना को बढ़ाने के लिए तरस जाएंगे। यह सोचा था कि चेतना के माध्यम के कारण मध्यम वर्ग सबसे अधिक प्रभावित किया जाएगा और अभी तक यह नहीं है के रूप में हालांकि यह धनी वर्ग से अप्रभावित रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट रूप से धन के दुरुपयोग की सख्त परिणाम ध्यान दें। तथाकथित बुद्धिजीवियों की सूखी तार्किक दिमाग विश्वास में से एक के रूप में तब्दील हो जाएगा। एक बहुत ही स्वाभाविक तरीके से अपनी आत्मा को प्रकट करेगा आस्था, विश्वास और ज्ञान। बौद्धिक नास्तिकों में यह सोचा था कि प्रवाह उन में इस तरह के विश्वास रंगना करेगा कि धर्म और आधुनिक विज्ञान एक दूसरे के साथ आपस में भिड़े नहीं हैं, लेकिन वे परस्पर एक दूसरे को लाभ हो सकता है। एक गाड़ी के 2 पहियों की तरह यदि मिलकर दोनों काम वे साबित होगा एक कठोर मानव पतन का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं और कुछ एक तरफा प्रगति मानव प्रगति में बहुत सहायक हो सकता है। ऊपर सोचा चेतना के कारण यह समय नहीं है एहसास है कि उच्च कद आध्यात्मिकता के सामने, न केवल भौतिकवाद की सतही चमक मंद लेकिन एक चमकदार चमड़ी साँप है कि सदृश यह साबित कर सकते हैं बहुत ही जघन्य हो जाएगा। मछली अवतार करने के लिए समान 21 वीं सदी में हर नुक्कड़ और दुनिया के कोने और इस तरह एक उज्ज्वल भविष्य में फैलाएगा चेलों के बारे में उनकी बढ़ाने सैनिकों के माध्यम से महान संत की यह सोचा था