परमेश्वर कबीर जी की ज्ञान लीलाएं

परमेश्वर कबीर जी की ज्ञान लीलाएं
धरती पर सतलोक संत रामपाल जी महाराज ने उतार दिया है सतलोक आश्रम में

मंगलवार, 27 मार्च 2018

आओ सनातन लोक चले और इस मृत्युलोक हमेशा के लिए अलविदा कहे




आओ  सनातन लोक चले  और इस मृत्युलोक को हमेशा के लिए अलविदा कहे ।।  न स्वर्ग चाहिए न नरक चाहिए  और न ही किसी भी देवी देवता का लोक चाहिए हमे तो सिर्फ हमारा  मूल सनातन लोक चाहिए।
एक सनातन परमेश्वर हमारा ,  एक  सनातन लोक हमारा , वहां वापस जाने का एकहि  भक्ति बिधि  हमारे लिए ,
जिसे अपनाकर हम  यहां से मुक्ति के और सनातन लोक के अधिकारी बनेंगे ।


गीता जी का आदेश है कि पूर्ण तत्त्व दर्शी संत से मूल ज्ञान रूपी सस्त्र से  माया द्वारा फैलाये अज्ञान  को काट कर    नए मर्यादित जीवनन  को धारण कर
  ब्रह्म गायत्री मंत्र से देवताओ को साध कर ओम तत और सत मन्त्रो से परमेश्वर की भक्ति करे
 इस तीन प्रकार से तत्वदर्शी संत रामपाल जी से  पूर्ण भक्ति बिधि प्राप्त कर मृत्युलोक से हमेशा मुक्त हो सनातन लोक को जाए ।। जय हो आदि राम की ।  देखे प्रतिदिन शाम 7:30 से 8:30  साधना tv पर
jagatgururampalji.org

गुरुवार, 22 मार्च 2018

जानिए वो सच जिसे मीडिया ने और सरकार ने आपसे छुपाया । क्लिक करे


जानिए वो सच जिसे मीडिया ने और सरकार ने आपसे छुपाया । जिसकी सीबीआई जांच कीआंग से सरकार और मीडिया और कुछ भ्रष्ट जज डरते है ।
इस लिंक को क्लिक करे और देखे
लिंक 👉करोथा और बरवाला काड का सच।।

गुरुवार, 15 मार्च 2018

आपकी 101 पीढ़ी का मोक्ष पक्का है देखें इस वीडियो में।

https://youtu.be/gbJMWbjJPZU                                            _______________________________
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            *वह मन्त्र जिसको पाने       के लिए लाखों ऋषि मुनि हज़ारों वर्षों तक तपस्या कर    करके मर         गए                                        पर उसकी प्राप्ति नही हुई वह मन्त्र का खुलासा संत रामपाल जी ने किया है और।                            जिससे आपकी 101 पीढ़ी का मोक्ष पक्का है देखें इस वीडियो में।*

   पूरे विश्व मे हर इंसान तक यह वीडियो
        पहुँचा दो ताकि सबको अपना कल्याण का रास्ता पता चल जाएगा।
    https://youtu.be/gbJMWbjJPZU          🕯🕯🕯🕯🕯🕯

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       *इस वीडियो को सबको दिखाओ*
 
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  *वीडियो पर लाइक, कमेंट जरुर करें*
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              🙏 🙏
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*Note : आगे forward करना न भूलें।*

बुधवार, 14 मार्च 2018

सावधान 🚨सावधान 🚨सावधान ""अंध श्रद्धा भक्ति खतरा-ए-जान""👇👇 **

सावधान 🚨सावधान 🚨सावधान
 ""अंध श्रद्धा भक्ति खतरा-ए-जान""👇👇
 ** http://www.jagatgururampalji.org/click.php?id=9 **
⭐ स्टार मार्क लगा दे क्लिक करके और 5 -- 7 मिनट निकाल कर कृपया पूरा पढ़ें🌺🌷
"""""परमात्मा का संदेश ✉"""""
कहीं आप भी मृत्यु के बाद  यह मत कहना कि भगवान हमें पता नहीं चला  या किसी ने बताया नहीं की भक्ति भी करनी चाहिए  या कैसे करनी चाहिए 🔊
परमात्मा हर युग में आते हैं या अपने संतों को भेजते हैं और अपना ज्ञान बताते हैं | कुछ उन्हें पहचान लेते हैं उनके ज्ञान से और अपना कल्याण करवाते हैं | इस समय भी धरती पर पूर्ण संत मौजूद हैं और यह भक्ति का समय चल रहा है
इसलिए ज्ञान विचार कर अपने शास्त्रों 📚को समझें और इस मनुष्य जीवन के मूल उद्देश्य को पूरा करें | यदि फिर भी आप परमात्मा के ज्ञानको ना समझ पाए तो इसके लिए परमात्मा जिम्मेवार नहीं होगा हम खुद  दोषी होंगे
»»»»सर्व ग्रंथों में प्रमाण है,कबीर जी ही भगवन हैं।|««««
*************100%**************
ऋग्वेद मण्डल नं 9 सूक्त 96 मंत्र 17
ऋग्वेद मण्डल नं 9 सूक्त 96 मंत्र 18
ऋग्वेद मण्डल नं 9 सूक्त 96 मंत्र 19
ऋग्वेद मण्डल नं 9 सूक्त 96 मंत्र 20
ऋग्वेद मण्डल नं 10 सूक्त 90 मंत्र 3
ऋग्वेद मण्डल नं 10 सूक्त 90 मंत्र 4
ऋग्वेद मण्डल नं 10 सूक्त 90 मंत्र 5
ऋग्वेद मण्डल नं 10 सूक्त 90 मंत्र 15
ऋग्वेद मण्डल नं 10 सूक्त 90 मंत्र 16
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यजुर्वेद अध्याय 19 मंत्र 26
यजुर्वेद अध्याय 19 मंत्र 30
यजुर्वेद अध्याय 29 मंत्र 25
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सामवेद संख्या नं 359 अध्याय 4 खण्ड 25 श्लोक 8
सामवेद संख्या नं1400 उतार्चिक अध्याय 12 खण्ड 3 श्लोक 5
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अथर्ववेद काण्ड नं 4 अनुवाक नं 1 मंत्र 1
अथर्ववेद काण्ड नं 4 अनुवाक नं 1 मंत्र 2
अथर्ववेद काण्ड नं 4 अनुवाक नं 1 मंत्र 3
अथर्ववेद काण्ड नं 4 अनुवाक नं 1 मंत्र 4
अथर्ववेद काण्ड नं 4 अनुवाक नं 1 मंत्र 5,6,7
***********************************
""""""""श्रीमद्भागवतगीता में प्रमाण""""""""
अध्याय 8 श्लोक 9
अध्याय 15 श्लोक 17
अध्याय 18 श्लोक 62,66
**********************
""""""""क़ुरान शरीफ में प्रमाण""""""""
सूरत फुर्कानि 25 आयत 52 से 59
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""""गुरु ग्रंथ साहिब में प्रमाण""""
गुरुग्रंथ साहिब पृष्ठ नं 721 महला 1
गुरुग्रंथ साहिब के राग "सिरी"महला 1 पृष्ठ नं 24
गुरुग्रंथ साहिब राग आसावरी,महला 1 पृष्ठ नं 350,352,353,414,439,463,465
**************************************
"""""संतो की वाणी में प्रमाण"""""
"कबीर परमेश्वर जी"

ए स्वामी सृष्टा मैं, सृष्टि हमारे तीर।
दास गरीब अधर बसूं, अविगत सत्य कबीर।।

सोलह संख पर हमारा तकिया,हम गगन मण्डल के जिन्दा।
हुक्म हिसाबी हम चल आये,कटान यम के फंदा।।
हम है सत्यलोक के वासी,दास कहाये प्रगट भये काशी।
नहीं बाप ना माता जाये, अविगत से हम चल आये।।
******************************************
""""""गुरु नानक जी"""""'

यक् अर्ज गुफ्तम् पेश तो दर गोस कून करतार्।
हक्का(सत्त)कबीर करीम तू बेएब परवरदीगार।।
फाई सुरत मलूकी वेश, ओह ठगवाड़ा ठग्गी देश ||
खरा सयाणा बहुता भार, धानक (जुलाहा) रूप रहा करतार ||
************************************ """""""संत दादू दास जी"""""""

कबीर कर्ता आप हैं,दूजा नाहिं कोए।
दादू पूरण जगत को,भक्ति दृढावत सोए।।
अबही तेरी सब मिटे, जन्म मरण की पीर।
स्वांस उस्वांस सुमिरले, दादू नाम कबीर।।
********************************
""""""""संत गरीबदास जी""""""'"

अनंत कोटि ब्रह्मण्ड का,एक रति नहीं भार।
सतगुरु पुरुष कबीर हैं,कुल के सृजनहार।।
अनंत कोटि ब्रह्माण्ड में बंदी छोड़ कहाये।
सो तो एक कबीर हैं जननी जने न माये।।
********************************
*बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज जी की जय*
**सत् साहेब जी**

हमारा मूल कर्तब्य इस मृत्युलोक रूपी जेल से मुक्त हो हमेशा के लिए सनातन लोक जाना

"""छःसौ वर्ष बाद वही ईतिहास दोहराने की कोशिश"""
#छःसौ वर्ष पहले भी जब कबीर #परमेश्वर जी हमें निज धाम सतलोक ले जाने के लिये आये थे तो उस वक्त भी उनको बहुत संघर्ष करना पड़ा था पाखंडी #पंडितो ओर #मुल्ला #काजियो ने #कबीर_परमात्मा का बहुत विरोध किया उन्हे झूठा बदनाम किया उन्हे यहां तक की उन्हे खत्म करने के लिये सभी प्रयास किये तोप से उड़ाने की कोशिश, भूखे शेर के पिंजरे में डाला, हाथी से कुचलना चाहा तो कभी गंगा में डुबोना चाहा, उबलते गर्म तेल की कड़ाई में डाला लेकिन वो दुष्ट लोग #अविनाशी #कबीर #परमात्मा का कुछ नही बिगाड़ पाये वो चाहते तो क्षण भर में सबको सबक सिखा सकते थे लेकिन उन्होने ऐसा नही किया परमात्मा कहते है यह सब मेरी ही आत्माये है यह भटके हुऐ है कयोकी बच्चे जितने मर्जी बुरे हो जाये लेकिन मां बाप कभी गलत नही हो सकता ईसलिये परमात्मा उनके जैसा नही बन सकता बल्कि हमे सीधे मार्ग पर लाने लिये हर कष्ट को सहन किये लेकिन हम नीच लोग फिर भी परमात्मा को पहचान नही पाये ओर वो 120 वर्ष लीला करने के बाद #मगहर से #स्हशरीर वापिस #सतलोक चले गये ओर हम आज तक ईस गंदे लोक में भटक रहे है यह हमारी उसी गलती की सजा है .
अब छःसौ वर्षो बाद परमात्मा पुनः आये है फिर वही लीला कर रहे है ओर हमारे लिये बहुत जुल्म सह रहे है दूसरी बार जेल चले गये  लेकिन हम नीच फिर वही गलती दोहराने की राह पर चल रहे है लेकिन ईस बार यह अंतिम मौका है.
गरीब, यह चूक !
धूरो दूर !!
अबकि चूक गये तो पता नही काल कहां पटकेगा लख-चौरासी के फेर में कुत्ते गधे सुअर बनकर यहीं धक्के खाते रहेंगे. पिछली गलती को न दोहराये ईसलिये भक्त समाज से निवेदन है की संत रामपाल जी को पहचानो उनके वचनो को सुनो फिर अपने विवेक से निर्णय करो की संत रामपाल जी कया है ऐसे ही किसी कही सुनी बातो पर विश्वास करके संत रामपाल जी को बुरा न समझे वो सबका कल्याण करने के लिये आये है यह सुनहरा अवसर है संत रामपाल जी की शरण में आओ ओर अपना कल्याण करवाओ .
मानुष जीवन दुर्लभ है, मिले न बारम्बार !
जैसे तरूवर से पत्ता टूट गिरे, बहुर लगे न डार !!

सत् साहेब,

सोमवार, 12 मार्च 2018

हे जीवात्माओं , इस मृत्युलोक की मूर्खता से बाहर निकलो देखो परमेश्वर ने तुमको अपने सनातन लोक वापस बुलाने अपना अंश भेज दिया है पहचानो उसको

हे जीवात्माओं , इस मृत्युलोक की मूर्खता से बाहर निकलो देखो परमेश्वर ने तुमको अपने सनातन लोक वापस बुलाने अपना अंश भेज दिया है पहचानो उसको । यदि इस बार आपने गफलत की तो हो सकता है ये मौका आपको कई युगों तक न मिले । क्योंकि आप माया और माया पति काल ब्रह्म के कैदी हो ये नही चाहता आप यहां से सारा सच जान कर भक्ति कर मुक्त हो सतलोक अर्थात सनातन लोक जाए इसलिए इसने सभी जीवों की दुर्गति की हुई है और आपको भक्ति लायक नही छोड़ा है और जो भी आप भक्ति कर रहे हो वो नकली है मुक्ति दायक नही। हे जीवात्माओं । आपको उलझने इस माया ने आपको कई पंथो में , कई धर्मो में , के भाषाओ में , कई गुटो में आपको बांट दिया । और तरह की गलत आदते आपको डाल दी । है जीवात्माओं ! आप हमेशा भगवान को , परमेश्वर को दोष देते हो । किन्तु आप ये बताओ कि आप भगवान की , परमेश्वर की कितनी बात सुनते हो और पालन करते हो कि जो वो आपकी सुने । गीता जी मे भगवान ने ब्रत रखने को मना किया है । सभी मनमाने आचरण धार्मिक क्रियाओ को त्यागकर एक परमेश्वर की शरण मे आकर परमेश्वर के तत्त्व दर्शी संत के माध्यम से भक्ति करने का आदेश है ।। लेकिन ये क्या आप ब्रत रख कर भगवान का आदेश तोड़ते हो । दुर्गति तो होगी ही। भक्ति के नाम तरह तरह से मनमाना आचरण धार्मिक क्रियाये कर भगवान की आप अनादर ही करते हो । आप कहोगे की नही हम मनमाना आचरण नही करते हम तो ब्राह्मणों से पूछ कर करते है । याद रखो भगवान के आदेशो के विपरीत है तो तो कोई भी कुछ कहे है मनमाना आचरण ही। और हां सुनो पवित्र देवी भागवत पुराण के तीसरे स्कन्ध में एक प्रकरण है कि देवी दुर्गा जी ने ब्रह्मा जी को शाप दिया है कि तेरे वंशज ब्राह्मण झूट बोलेंगे और संसार का नाश करेंगे । इसलिए इन कथित शापित ब्राह्मणों से साबधान ।। आपको सम्पूर्ण कड़वी सच्चाई बताने गुप्त सनातन भक्ति प्रदान करने परमेश्वर ने अपना अंश संत रामपाल जी को हमारे बीच भेज दिया है । आओ ब्रह्म गायत्री व प्रणव तत सत गोपनीय मन्त्र ब भक्ति प्राप्त करो ।। साधना tv रोज शाम 7:30 से 8:30 तक देखे वेबसाइट jagatgururampalji.org पर विजिट करे और सम्पूर्ण ब्रह्म ज्ञान कराने वाली पवित्र पुस्तके प्राप्त करे

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शनिवार, 10 मार्च 2018

श्रीदेवी की आकस्मिक मृत्यु ने एक विचार को जन्म दिया की ईश्वर के दिये हुए इस शरीर को नकारो मत!अपने आप को स्वीकारो? पढ़िये ज्ञानवर्धक पूरी पोस्ट

श्रीदेवी की आकस्मिक मृत्यु ने एक विचार को जन्म दिया की ईश्वर के दिये हुए इस शरीर को नकारो मत!अपने आप को स्वीकारो?

श्रीदेवी अपने समय की टॉप हीरोइन रही हैं और वो भी बिना प्लास्टिक सर्जरी के।
फिर 50 पार करके उन्हें अचानक 20 साल का दिखने की धुन सवार हो गई। उसके चलते उन्होंने ढेरों सर्जरी करवाई। gym, योग, डाइटिंग कुछ भी नही छोड़ा।

ये सब उन्होंने स्वस्थ रहने के लिए नही बल्कि जवान दिखने के लिए किया। शरीर पर हर तरह के अत्याचार किये। तो एक दिन शरीर ने उन्हें धोखा दे दिया।

हमारे समाज मे स्त्रियों को सुंदर व जवान दिखने पर बहुत जोर है। क्योकि साधारण दिखने पर शायद उन्हें वो स्थान नही मिल पाता।

सुंदरता बेचने के नाम पर गली गली में ब्यूटी पार्लर भरे हैं। आपके सारे शरीर को तरह तरह के केमिकल्स से लबरेज़ करके आपको सुंदर बनाने का आश्वासन दिया जाता है। 20 तरह के facial बताये जाते हैं। 25 तरह के spa।


गाहे बगाहे शौक पूरा करके समझ आया कि ये सब मार्केटिंग का ड्रामा है क्योंकि ज्यादातर ब्यूटी पार्लर चलाने वाली महिलाएं खुद मोटी और भद्दी दिखती हैं तो वो मुझे क्या सुंदर बनायेंगी।

सुंदर दिखने का अधिकार हर स्त्री को है लेकिन बाहर की सुंदरता के साथ यदि अंदर की सुंदरता पर भी ध्यान दें तो आप और भी खूबसूरत हो सकते है।

सिर्फ पतला होना ही स्वास्थ्य की निशानी नही है क्योंकि बहुत से मोटे लोग उम्र पूरी करके जाते हैं और पतले लोग समय से पहले ।

अपने को बढ़ती उम्र के साथ स्वीकारना एक तनावमुक्त जीवन देता है। हर उम्र एक अलग तरह की खूबसूरती लेकर आती है उसका आनंद लीजिये।

, वज़न कम रखना है तो रखिये, मनचाहे कपड़े पहनने है तो पहनिए,बच्चों की तरह खिलखिलाइये, अच्छा सोचिये, अच्छा माहौल रखिये, शीशे में दिखते हुए अपने अस्तित्व को स्वीकारिये।

कोई भी क्रीम आपको गोरा नही बनाती, कोई शैम्पू बाल झड़ने नही रोकता,कोई तेल बाल नही उगाता, कोई साबुन आपको बच्चों जैसी स्किन नही देता। चाहे वो प्रॉक्टर गैम्बल हो या पतंजलि।सब सामान बेचने के लिए झूठ बोलते हैं। ये सब कुदरती होता है। उम्र बढ़ने पर त्वचा से लेकर बॉलों तक मे बदलाव आता है। पुरानी मशीन को maintain करके बढ़िया चला तो सकते हैं उसे नई नही कर सकते।ना किसी टूथपेस्ट में नमक होता है ना किसी मे नीम। किसी क्रीम में केसर नही होती क्योंकी 2 ग्राम केसर भी 500 रुपए से कम की नही होती।

lux की बनियान साधारण बनियान से इसलिये महंगी है क्योंकी उसमे विज्ञापन के लिए सनी देओल और अक्षय कुमार होते हैं। और वो लक्स नही calvin cline या पियरे कार्डिन पहनते हैं।
करीना कपूर कभी लक्स साबुन से नही नहाती और अमिताभ बच्चन लाल तेल नही लगाता।

कोई बात नही अगर आपकी नाक मोटी है तो,
कोई बात नही आपकी आंखें छोटी हैं तो,
कोई बात नही अगर आप गोरे नही हैं
या आपके होंठों की shape perfect नही हैं....

फिर भी हम सुंदर हैं, अपनी सुंदरता को पहचानिए। दूसरों से कमेंट या वाह वाही लूटने के लिए सुंदर दिखने से ज्यादा ज़रूरी है अपनी सुंदरता को महसूस करना।

हर बच्चा सुंदर इसलिये दिखता है कि वो छल कपट से परे मासूम होता है और बडे होने पर जब हम छल व कपट से जीवन जीने लगते है तो वो मासूमियत खो देते हैं। और उस सुंदरता को पैसे खर्च करके खरीदने का प्रयास करते हैं।

हमारी महिलायें दिन रात पार्लर के चक्कर काटती रहती हैं सुंदर दिखने के प्रयास में... लेकिन क्या ये प्रेशर उनके पति,घरवालों या boyfriends की ओर से आता है?साधारण दिखने वाली लड़कियों की शादी नही होती, सांवली लड़कियों को उपेक्षा झेलनी पड़ती है,मोटी लड़कियों पर पतले होने का दबाव होता है। इस प्रेशर के चलते उन्हें chemicals और दवाओं का सहारा लेना पड़ता हैं।

क्यों अभी भी हमारे समाज मे मन की खूबसूरती पर ध्यान नही जाता?

हमारे पुरुष वर्ग का ये कर्तव्य है कि अपने परिवार महिलाओ को ये प्रेशर देना छोड़ दें। अपनी पत्नी, बेटी, बहन को ये अहसास दिलायें की वो प्राकृतिक रूप से सुंदर हैं वरना वो केमिकल्स का सहारा लेकर अपना स्वास्थ्य खराब कर लेंगी।

थोड़ा बहुत चलता है लेकिन सुंदर दिखने की चाह में कुछ भी कर गुज़रना आपकी जान ले सकता है।

आजकल युवा लड़के बॉडी बनाने की धुन में पागल रहते है ये असर है उन फ़िल्म स्टारों और मॉडल्स का जिससे ये युवा सोचते हैं कि वो अपने चहेते हीरो जैसी बॉडी बना कर हीरो जैसे दिखेंगे।

आपको शायद पता नही की एक भी हीरो naturally बॉडी नही बनाता। इनके पीछे बहुत सी प्लास्टिक सर्जरी, steroids implants, lyposuctions, body contouring का हाथ होता है। आपरेशन से 6 pack बनवाते हैँ, चेहरे पर सर्जरी करवाते हैं, बाल उगवाते हैं, मांसपेशियों में सिलिकॉन भरवाते हैं और ये सब वो इसलिते करते हैं क्योंकि उन्हें इन सबका पैसा मिलता है। स्क्रीन पर सुंदर दिखना उनके धंधे की मजबूरी है उसके लिये वो शरीर से भी खेलते हैं वरना उन्हें कोई काम नही देगा।

लेकिन आम जीवन मे हमे बॉडी दिखाने के पैसे नही मिलते काम करने के पैसे मिलते हैं तो हम हीरो जैसे दिखने से अच्छा है अपने काम मे हुनर दिखायें ।हमारी तरक्की तो उसी से होगी।

ये फ़िल्म स्टारों और मॉडल जैसा दिखने की चाह में हमारा समाज एक प्रेशर में जी रहा है।

पेट निकल गया तो कोई बात नही उसके लिए शर्माना ज़रूरी नही । आपका शरीर आपकी उम्र के साथ बदलता है तो वज़न भी उसी हिसाब से घटता बढ़ता है उसे समझिये।

सारा इंटरनेट और सोशल मीडिया तरह तरह के उपदेशों से भरा रहता है
ये खाओ,वो मत खाओ
ठंडा खाओ गर्म पीओ
कपाल भांती करो, पॉवर योगा करो
सवेरे निम्बू पीओ ,रात को दूध पीओ
ज़ोर से सांस लो, लंबी सांस लो
दाहिने से सोइये बाये से उठिए
हरी सब्जी खाओ, सब्जियी में हारमोन है
दाल में प्रोटीन है,दाल से स्वास्थ्य ठीक हो जायेगा

अगर पूरे एक दिन सारे उपदेशों को पढ़ने लगें तो पता चलेगा ये ज़िन्दगी बेकार है ना कुछ खाने को बचेगा ना कुछ जीने को!!आप डिप्रेस्ड हो जायेंगे।

ये सारा ऑर्गेनिक ,एलोवेरा, करेला,मेथी ,पतंजलि में फंसकर दिमाग का दही हो जाता है। स्वस्थ होना तो दूर स्ट्रेस हो जाता है।

अरे! कभी ना कभी तो मरना है अभी तक बाज़ार में अमृत बिकना शुरू नही हुआ।

हाँ एक जगह अमृत है वह है हमारे वेदों पुराणों व गीता मे।उस अमृत को चखने के लियें आप खोज बीन करिये सच्चे मार्गदर्शक की तलाश करिये ।

हर चीज़ सही मात्रा में खाइये, हर वो चीज़ थोड़ी थोड़ी जो आपको अच्छी लगती है।

थोड़ा बहुत शारीरिक कार्य करते रहिये काम करते हुये भगवान का भजन भी करते रहिये ।

अगर पैसे से सुंदरता व जीवन खरीद लिया जाता तो कोई बड़ा आदमी इस दुनिया से ना जाता और हर अमीर आदमी सुंदर होता।

अगर आपको निरोग होना है तो उन मन्त्रों का जाप करिये जो शास्त्रों में वर्णित है।वेद पुराण गीता का सच्चा ज्ञान हासिल कीजिये ।

आप चाहते है कि आपकी कभी मृत्यु ना हो तो काल भगवान का ऋण चुकाकर सतलोक चलिये जहाँ जन्म मृत्यु है ही नहीं

कैसे पहुँचेगे सतलोक उसके लिये निम्न लिंक में दिया सत्संग अवश्य सुनिए ।
👇👇👇👇👇👇👇👇
https://youtu.be/Z-pr6tXrOnI
👆👆👆👆👆👆👆👆

🙏🏻🙏🏻🌹🌹🙏🏻🙏🏻

🙏 *वेदों गीता व पुराणों में मौजूद है सृष्टि रचना का ज्ञान* 🌈


https://youtu.be/Z-pr6tXrOnI

👆सृष्टि रचना 🌈


सौजन्य से

🔥पाखन्डवाद बनाम यथार्थवाद🔥

🌎 चारों वेद अठारह पुराण गीता व सभी उपनिषदों के साथ कुरान तौरात जबूर इन्जिल बाइबिल बौध धर्म सिक्ख धर्म का अन्तिम व यथार्थ निष्कर्ष समझने के लिये देखें साधना टीवी पर शाम 7-30 से 8-30 तक🌎
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शुक्रवार, 9 मार्च 2018

इच्छा मृत्यु नही परम संत रामपाल जी की शरण ग्रहण कीजिये असाध्य बीमारियों से भी मुक्ति मिलेगी

 हमारे पवित्र वेद गवाही दे रहे है कि परम अक्षर ब्रह्म परमेश्वर कवीर अपनी शरण आये भक्तो के घोर से भी घोर पापो और कष्टों को मिटा देता है और आयु को भी सौ सौ वर्ष  बढ़ा देता है । सभी बंधनो से मुक्त करा सदैव के लिए सनातन लोक का स्थायी निवासी बनाता है । सभी जीवों को केवल कवीर परमेश्वर की भक्ति करनी चाहिए।
त्रिगुण माया से भ्रमित जीवो को पूर्ण सच्चाई बताने वह पूर्ण परमेश्वर परमात्मा कवीर सनातन लोक से चलकर शिशु रूप धारण कर पवित्र सरोवर में कमल के फूल पर आकर विराजमान होते है और उसकी इच्छा से निः संतान दंपत्ति उसको उठा कर ले जाते है और कुवारी गाय के दूध से उसके पालन पोशनकी लीला पूरी होती है । और वो कविताओं के माध्यम से गा गा कर सच्चाई बता जाता है। मूर्ख संसार उनको केवल एक महान समाज सुधारक कवि मानकर रह जाता है ।
और उनको पहचानने वाले ज्ञानी जीव उसकी शरण मे अपना कल्याण करा लेते है । सशरीर आता है और सशरीर चला जाता है।
600 वर्ष पूर्व काशी में परमेश्वर कवीर जी आये और 64 लाख जीवो को शरण लिया । और उन्होंने गुरु परंपरा शुरू की
उसी क्रम में  संत रामपाल जी को हमारे दादा गुरु जी संत रामदेवानंद जी ने गुरु पदवी का भार सौंपा। जिससे  कवीर परमेश्वर की पावर संत रामपाल की के माध्यम से जीवो का कल्याण कर रही है । आप भी आये और सारी सच्चाई प्रमाण सहित जाने और मूल भक्ति प्राप्त कर सतलोक के अधिकारी बने ।
 साधना tv पर प्रतिदि दिन शाम को 7:30pm से 8:30pm तक रोज देखे सच्चाई ।
वेबसाइट से पुस्तके फ्री डाउनलोड करें
www.jagatgururampalji.org








गुरुवार, 8 मार्च 2018

देश के सभी भाई बन्धुओं से एक अपील है ।* "कि जागो और सवाल करो इन देश के पाखंडी धर्मगुरुओ से"

*सत् साहेब जी*

*देश के सभी भाई बन्धुओं से एक अपील है ।*

"कि जागो और सवाल करो इन देश के पाखंडी धर्मगुरुओ से"

जो इन बिकाऊ मीडिया चैनलों पर दिन रात पागलों की तरह सुनी सुनाई बाते भोंकते रहते है जिनकी बातो का ना कोई सार है ना सारांश।

प्रश्न-1 👉 पूछो इन पाखंडियो से जब द्वापर युग में वेदव्यास सहित सभी ऋषि मुनियों ने राजा परीक्षित को ये कहकर भगवत की कथा सुनाने से इनकार कर दिया था कि हम ये कथा सुनाने के अधिकारी नहीं है तो फिर इस कलयुग में तुम्हे किसने भागवत और रामायण का पाठ करने का लाइसेंस दे दिया।

प्रश्न 2 👉पूछो इन पाखंडियो से जब तुम्हारे तीनो भगवान् ब्रह्मा विष्णु महेश स्वयं कह रहे है कि हमारी जन्म और मृत्यु होती है यानी नाशवान है हम पूर्ण भगवान् नहीं है, तो फिर पूर्ण परमात्मा कौन है,कैसा है,कहां रहता है और कैसे मिलता है!

*आपको ढुढ़ने का संकेत (श्री मद् देवी भागवत देवी पुराण 6 वां अध्याय, तीसरा स्कन्द, पेज नंबर 123)*

प्रश्न 3 👉पूछो इन पाखंडियो से जब भगवद् गीता जी मना कर रही है कि व्रत करने वाले, श्राद्ध निकालने वाले और देवी देवताओं की पूजा करने वालो को ना कोई सुख होता है ना ही मरने पर उनकी गति (मोक्ष) होती है।

*संकेत( 6 वां अध्याय 16 वां श्लोक)*

प्रश्न 4👉पूछो इन पाखंडियो से जिन 33 करोड़ देवी देवताओ को श्री लंका के राजा रावण ने अपनी कैद में डाल रखा था फिर क्यों सदियों से हमसे ये ऋषिवर बेबस देवी देवता को पूजवाते आ रहे हैं।

प्रश्न 5👉पूछो इन पाखंडियो से जब स्वर्ग के राजा इंद्र ने रावण पर हमला करके उसे न हराने पर व अपने आपको बचाने के लिए अपनी पुत्री की शादी रावण के बेटे मेघनाथ से करके अपने प्राणों की रक्षा की।

तो फिर किसलिए ये हमें मारने के बाद स्वर्ग भेजने की बात करते हैं।(क्योकिं इन्द्र राजा खुद स्वर्ग में अपनी रक्षा नही कर सका ।तो हम तुच्छ जीव वहाँ कैसे रह सकते है)

प्रश्न 6👉पूछो इन पाखंडियो से जब दशरथ पुत्र रामचंद्र का जन्म त्रेतायुग में हुआ था तो फिर सतयुग के लोग कौनसे राम की भक्ति करते थे।

प्रश्न 7👉पूछो इन पाखंडियो से श्री कृष्ण का जन्म आज से 5500 वर्ष पहले द्वापर युग में हुआ था । जबकि त्रेता व् सतयुग के इंसान तो जानते भी नहीं थे कि कृष्ण कौन है !

तो फिर ये कृष्ण को पूर्ण भगवान् कैसे माने हुए है !

प्रश्न 8👉पूछो इन पाखंडियो से ये कहते है कि वेदों में भगवान् की महिमा का वर्णन है।
तो फिर वेदों में कबीर (कविर्देव) के अलावा 33 करोड़ देवी देवताओ जैसे  राम, कृष्ण, व् ब्रह्मा विष्णु महेश दुर्गा किसी का भी नाम तक क्यों नहीं है!

प्रश्न 9👉पूछो इन पाखंडियो से गीता जी अध्याय नंबर 11 के श्लोक 32 मे श्री कृष्ण जी कहते है की अर्जुन मैं काल हुं और सबको खाने आया हुं । श्री कृष्ण अपने को काल कह रहा है फिर ये पाखंडी उसे जबरदस्ती भगवान् क्यों बना रहे है।

और भी ना जाने कितने सवाल है  जिनके जवाब इनके पास नहीं है।

अब तक तो आपजी भी समझ चुके होंगे कि ये हांडी पाके संत रामपाल जी के सामने आकर ज्ञान चर्चा करने की क्यों इनकी हिम्मत नहीं होती है।क्योकिं इनके पास पाखंड के अलावा कुछ भी नही है

आपजी इन पाखंडियो से पूछेंगे या नहीं, ये तो आपका अपना फैसला होगा।

लेकिन हिन्दुस्तान का नागरिक होने के नाते मैं आपसे पूछता हुं। यदि आपजी ने अब भी विचार नहीं किया तो आप पढ़कर भी अनपढ़ रहे।

इस शिक्षा से कमाया हुआ धन आपके साथ कभी नहीं जायेगा लेकिन पूर्ण संत की शरण लेकर कमाया हुआ भक्तिरुपी धन कई गुना होकर आपजी के साथ जायेगा।

जब पृथ्वी पर पूर्ण संत आ ही चुका है तो मत फंसो इन पाखंडियो के जाल में यदि फंसे हुए हो तुरंत निकल जाओ वहां से वरना ये स्वयं तो नर्क में जायेंगे ही जायेंगे तुम्हे भी साथ लेकर जायेंगे। और तुम्हारे बच्चों को भी तैयार कर जायेंगे नर्क मे जाने के लिए ।

यदि संत रामपाल जी को जेल में देखकर आप जी को अभी भी शंका हो तो याद करलो त्रेता में रामचंद्र को भी 14 वर्ष तक जेल काटनी पड़ी थी।
सीता जी को भी 12 वर्ष तक भूखी प्यासी रावण की जेल काटनी पड़ी थी।
द्वापर में श्री कृष्ण का तो जन्म ही जेल में हुआ था।
यदि आप इसे उनकी लीला कहते हो तो कोई बड़ी बात नहीं आने वाले समय में संत रामपाल जी का भी इतिहास बन जायेगा। लेकिन उनके चले जाने के बाद उनके आश्रमो में वे नहीं मिलेंगे केवल पश्चाताप मिलेगा।
लेकिन अभी समय है। जाग जाओ औरों को भी जगाओ भगवान् आएगा तो कोई दो सींग लगाकर तो आएगा नही जो अलग ही दिखाई दे। उसे ज्ञान के आधार से पहचानने के लिए ही तो आज आपजी को उस मालिक ने शिक्षित किया है।

🙏🙏 अतः आपसे पुनःप्रार्थना है कि आप चिंतन अवश्य कीजिये व दुसरों को भी इस मैसेज के माध्यम से इन पाखंडियो के पाखंड से सचेत करने की कोशिश कीजिये।...

*अधिक जानकारी के लिए फ्री मे ज्ञान गंगा पुस्तक मंगवाने के लिये अपना पता मेसेज करे👉:-07666640425*

*प्रतिदिन शाम को 7:40 से 8:40 तक अवश्य देखिये साधना चैनल पर संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन ।*

*सत् साहेब*

सोमवार, 5 मार्च 2018

क्या आप अपने जीवन का स्कोर जानना चाहेंगे । आइये हमारे इस पोस्ट पर

🔑🔑🔑🔑🔑🔑🔑

क्या आप जानते है ?


कि आपका सिबिल स्कोर क्या है, जरूर जानते होंगे !

लेकिन आप जानते है कि आपका लाईफ स्कोर क्या है ।

आप पूछेंगे ये क्या होता है ?

अगर मै आप से पुछु की आपके जीवन का लक्ष क्या है ?

क्या आप इस जन्म के बाद अभी आप जहां है वहीं रहना चाहते है की इससे नीचे की ओर जाना , कि ऊपर की ओर ?

तो आपका जबाब होगा हर कोई उपर की ओर ही जाना चाहता है ।

लेकीन आप उपर की तरफ जाने के क्या प्रयास कर रहे हो ।

यहां पर आपके द्वारा अर्जित किया गया धन संपत्ति काम नहीं आता । यहां तो केवल आपके द्वारा किए गए कर्मो कि ही गणना की जाती है ।

इसे वेद में कर्म फल का सिद्धांत कहा जाता है ।

यानी कि आपने अपने लाइफ में ५०% अच्छे कार्य किए और ५० % बुरे, तो कर्म फल के सिद्धांत के अनुसार आप मरने के बाद मनुष्य योनि पाने के हकदार है किन्तु आपका जन्म एक निम्न वर्ग परिवार में होगा, यानी कि मजदूर , चपरासी आदि परिवारों में ही जन्म मिलेगा । अगर आप अपना स्कोर ६०* ७०% तक कर लेते हो तो आपका जन्म धनाढ्य परिवार में होगा, अगर स्कोर ८०*९०% तक कर लेते हो तो आपका जन्म राजा के घर में मिलेगा । अगर आप सच्ची भक्ति के साथ स्कोर १००% कर लेते है तो आप सनातन लोक  अर्थात पूर्ण मोक्ष पा जाएंगे ।

चलिए यहां तक तो आप समझ लिए ।

परंतु अगर आपका स्कोर ५०% से कम रहा तो आप नीचे के योनियों में डाल दिए जाएंगे । जैसे जानवर, पशु, पक्षी, पेड़, पौधे,जलचर आदि ।

यहां तक तो ठीक है,लेकिन आपका स्कोर अगर माइनस में चला गया तो ?

यह नरक जैसा है, बैल घोड़ा गधा तो बनोगे लेकिन केवल इतने से काम नहीं चलेगा मालिक पिछवाड़े पर चाबुक भी बजाता रहेगा ।

स्कोर माइनस में क्यों जाता है ? जब इंसान चोरी हत्या पाप करता है, अपने स्वाद के लिए किसी की हत्या करता है,मिलावट जमाखोरी कम तोलना,झूठ बोलना,किसी के बारे में बुरा सोचना, तो तेजी से हमारा स्कोर घटने लगता है ।

ये विचार मेरे नहीं है, अपितु ये वेदों से लिए गए है ।

इस पर जरूर गौर करे,क्या जरूरी है सिबिल स्कोर या लाईफ स्कोर ?

वैसे आप अगर लाईफ स्कोर समझ गए तो सिबिल स्कोर तो कभी खराब ही नहीं होगा

प्रतिहर शाम

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शनिवार, 3 मार्च 2018

supreme GOD has come in north india

SupremeGod created the world in 6 days and 7th days sat on his throne, that Supreme God as Sant Rampal Ji to tell the whole truth to be kind to their children has appeared in India,  visit on this website www.jagatgururampalji.org  for  full knowledge in English and other languages you ​​can downloade Free Ganga book read, Know-kept secrets.

 daily evening on sadhna tv at time 7:30 pm to 8:30pm indian time

नकली सनातन धर्मी और असली सनातन धर्मी

समाज में  कुछ को छोड़ कर कथित सनातन धर्मी  आर्य समाजी  सफेद पोश में राक्षस ही है
ठगी करना बेमानी करना , बीड़ी सिगरेट पीना , शराब पीना, तरह तरह के नशे करना , मासाहार करना,  जात ,  सत्यार्थ प्रकाश नामक पुस्तक के जरिये
श्री राम , गुरुनानक जी , कृष्ण जी , मोहम्मद साहब जी आदि पीर पगेम्बर संतो अवतारों को  काल्पनिक बताना या उनको मूर्ख जंगली बताना , और स्त्रियों के बारे में आपत्ति जनक  बाते लिख कर प्रचार करना प्रमाण के लिए सत्यार्थ प्रकाश पढ़ सकते हो।  षड्यंत्र कर सच को दवाना । शास्त्रो के रहस्यो से अनजान और शास्त्रो के नाम पर मनमाना आचरण करना और करवाना पाखंडवाद को बढ़ावा देना आदिअनेको  बीमारियों से ग्रसित नकली लोग----


परमेश्वर ने अपना अंश संत रामपाल जी को भेज कर  जीवो पर उपकार किया  लाखो जीव  बुराईयो को त्यागकर परमेश्वर के संत की शरण मे आयी है और साफ जीवन उच्च विचार शास्त्र अनुसार सनातन भक्ति कर सभी देवी देवताओं को साधकर सत्पुरुष की भक्ति कर सनातन लोक को जाने की तैयारी कर रहे हौ
 ये है सच्चे सनातन धर्मी आर्य
आप भी आओ अपना कल्याण करो
साधना tv 7:30pm से 830 pm
हर रोज शाम
jagatgururampalji.org


सच क्या है और वर्तमान में पूरा सच बताने वाला कौन है। जरूर पढ़ें ।।

 परमपिता परमेश्वर को व उनके सभी जीवात्माओं को प्रणाम

हे ! जीवात्माओं हम सभी सनातन लोक में मस्त थे सुखी थे आनंदित थे । हम सभी इस मृत्युलोक में स्वेच्छा से आ फंसे और मायापति व माया के आधीन होकर इसके प्रपंच में असंख्य जन्मो से दुख व कष्ट भोग रहे है । सभी के मन मे एक प्रश्न जरूर आता होगा कि  हम सबका मालिक एक है और वह बहुत दयालु है और सर्वशक्तिमान है तो फिर हम उनके बच्चे दुखी व परेशान क्यों है ।
   इस प्रश्न का उत्तर स्वयम परमेश्वर में अपनी सच्चिदानंद घन की वाणी अर्थात कवीर वाणी में दिया है कि हम सब जीभ सत्पुरुष और सनातन लोक को छोड़ इस मृत्युलोक में आये और नियम के मुताबिक
जब जीव सच को स्वीकार करेगा और भगवान के आदेशानुसार मर्यादानुसार
 भक्ति करेगा तो वो जीव सनातन लोक को जाएगा
सभी जीव सही भक्ति करके सनातन लोक को चले न जाए इसलिए मायापति अपनी माया से जीवो को भरमा कर  देव और दानव , अलग अलग भाषा और धर्मो में । भगवान के आदेशों के विरुद्ध भक्ति और साधना के मनमाने आचरण पर लगाकर  , मासाहार शराब , तम्बाखू ,शराब मदिरा जुआ आदि कुकर्मो में डाल कर कर्म बिगड़वाता है और जीवो की दुर्गति इस तरह करता है कि वो स्वर्ग नरक व पृथ्वी का चक्कर लगा लगा कर नास्तिक हो जाये ।
और आज इस पृथ्वी पर ऐसा ही दिखता है
इस पृथ्वी पर जीवो पर उपकार करने खुद सत्पुरुष पार ब्रह्म परमेश्वर कवीर जी आकर मूल सच से अवगत कराता है और शरण आये जीवो को भक्ति प्रदान करता है भक्ति के लिए आयु भी बढ़ा देता है।  बुराईया छुड़वाकर भक्ति करवाकर अपने साथ सनातन लोक को ले जाते है ।
आज माया ने असंख्य नकली धर्म गुरु छोड़ रखे है जिनसे उसने जीवो को भगवान के आदेशों के विरुद्ध मनमाने आचरण पर लगाया हुआ है
है
जीवात्माओं  खुशी की बात यह है कि
सनातन सत्पुरुष परमेश्वर ने  हम सबका उद्धार करने अपना अंश संत रामपाल जी को भेज दिया है  और माया व मायापति की पोल खोल दी है
और जीवो को वो भक्ति दे रहा है जिससे  सभी देवी देवता प्रसन्न होते है व ऋण मुक्ति देते है और जीव सदा के लिए सभी बंधनो से मुक्त हो मृत्युलोक से मुक्त हो आदि अजर अमर सनातन लोक को वापस जाता है
आज इस संत रूप परमेश्वर की शरण मे आये जीव
सारे विकार छोड़ जन्म मरण से मुक्ति हेतु सनातन लोक की प्राप्ति हेतु वेदों व गीता जी मे भगवान के आदेशानुसार भक्ति कर रहे है।।
 और विस्तार से जानने के लिए  रोज शाम को साधना tv पर 7:30 pm बजे से 8:30pm बजे तक  परमेश्वर के अंश के मुखारविंद से प्रमाणितकड़वा सच जाने व गुप्त भक्ति मार्ग को पहचाने ।
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गुरुवार, 1 मार्च 2018

कड़वा सत्य जरूर पढ़िए

जो लोग वेदो मे लिखे कवि, कविरदेव को कबीर नहीं मानते व संत जेल में क्यूं है बाहर क्यूँ नहीं आ जाते इस प्रकार के सवाल करते हैं ऐसे भाई बहन इस लेख को अवश्य पढ़े।। 👇👇👇

तो महाशय कौन सा कवि है जिसे भगवान की संज्ञा मिली है कौन सा कवि है जो माता कै गर्भ में नहीं आया प्रगट हुआ है, कौन सा कवि है जिसने तीनो देवो से लेकर ब्रह्म, परब्रह्म व पारब्रह्म तक का ज्ञान दिया है, वो कौन सा कवि है जिसने एक परमात्मा का मैसेज व भक्ति विधि व सभी धर्मों के लोगों को एक होने का मैसेज दिया! वो कौन कवि है जो लोगों को चाहे किसी भी धर्म के हो उन्हें पाखडंवाद से बाहर आने की शिक्षा दी , और वो कौन कवि हुआ है जिनके लिए हिन्दू मुस्लिम अलग अलग विचारधारा होने के बावजूद उनके लिए मरने मिटने को आतुर हुए ऐसा कौन कवि हुआ है जो शरीर समेत यहां से अपने लोक को लोट गये।
अब वेदो ने तो ऐसे विलक्षण प्रतिभा वाले कवि को देव भगवान कहा है कविरदेव कहा है, आपको ऐसे
कवि का पता तो बताना हम तो उस वेदो मे वर्णित कविरदेव को कबिरदेव बोलते हैं आप कुछ ही समझे।।
और रही बात संत जी के जेल से बाहर आने की तो यही कंहुगा की वे आज बाहर आ जाये तो भी आपकी सोच वाले लोग उनके पैरों में तो लौटने से रहे, आपकी सोच नहीं बदलेगी उनके बाहर आने से, आपकी सोच बदलेगी उनके दिये प्रमाणित ज्ञान से, वे चमत्कार से भी बाहर आ जाये तो भी आप लोगों पर असर नहीं पडने वाला क्योंकि तुम कृष्ण को भज सकते हो, राम को भज सकते हो।। बुध्द को, महावीर को, लेकिन जब महाबीर जिंदा थे तो तुमने पत्थर मारे और जब बुध्द जिंदा थे तो तुमने उनकी हत्या की कोशिश की! अब तुम मीरा के गुणगान करते हो और जब मीरा जिंदा थी तो जहर के प्याले भेजे! तुम बडे अजीब लोग हो! तुम्हारा हिसाब कैसा है? अब जितने मंदिर जीसस के लिए समर्पित है, उतने किसी के लिए भी नहीं। ओर जब जीसस जिंदा थे तो तुमने क्या व्यवहार किया? जरा सोचो! जीसस को सूली खुद अपने कंधों पर ढोनी पडी!
जैसे जीसस कोई चोर हो, हत्यारे हो।
तुम लोग कैसे हो जिंदा गुरु को मारते हो,
और मरते ही उनकी पुजा शुरू कर देते हो।।
संत रामपाल जी महाराज ने कभी अपने को भगवान सिध्द करने की कोशिश नहीं की बल्कि परमात्मा कबीर भगवान की सटीक व प्रमाणित भक्ति देकर उन्होंने हमे करताथ किया है, बलिहारी गुरु आपने जो गोविंद दियो बताय।।
साधना tv हर रोज शाम 7:40pm से 8:40pm तक जरूर देखे और अपना मूल सनातन सच जाने जिसे जानने के बाद कुछ जानना शेष नही राह जाता और जीव केवल सनातन लोक जाने का भक्ति प्रयास करता है ।  वेबसाइट से निःशुल्क पुस्तके डाउनलोड करें www.jagatgururampalji.org

बुधवार, 28 फ़रवरी 2018

होली पर विशेश संदेश

*भक्ति के नाम पर भोली भाली जीवात्मा भगवान के आदेशों के विरुद्ध यानी शास्त्र विरुद्ध मनमाना आचरण कर*     *महादोषी*  , *भगवान के अपमानकर्ता*  ,   *महापापी* *पुण्यो का नाश करने वाले*   बन जाते है और मनुष्य जीवन रूपी अनमोल समय व पुण्यो का नाश करके  नरकगामी व  84 लाख शरीरो में असंख्य समय कष्ट भोगते है ।
*भगवान शास्त्रो में कहता है सभी जीब माया द्वारा भ्रमित है और उसी को सच मान  जीवन बर्वाद कर रहे है ।  *परम तत्व दर्शी संत बड़े सौभाग्य से प्राप्त होता है वो शास्त्रो को आधार बनाकर अज्ञान को काटता है और  मृत्युलोक से मुक्ति का सनातन लोक की प्राप्ति का भक्ति बिधि प्रदान करता है ।
  *उस तत्व दर्शी संत का शिष्य  सर्व देव शक्तियों को साध कर उनसे ऋण मुक्ति का सर्टिफिकेट ले कर    सनातन लोक को जाता है

अधिक जानकारी हेतु
साधना tv पर प्रति दिन शाम को 7:40से8:40  तक देखे

शनिवार, 17 फ़रवरी 2018

प्रतिदिन अति गोपनीय ज्ञान घर बैठे कैसे देखे

अति गोपनीय सनातन सच तत्व ज्ञान को जानने के लिए प्रतिदिन शाम को  दिल थाम के तसल्ली से बैठकर  7:40pm बजे से  से 8:40pm बजे तक  साधना टीवी पर  परम दिव्य जगत गुरु तत्व दर्शी संत के मुखार्विन्द से सुने और  अपना मानव जन्म को सार्थक व् सफल करने का मार्ग प्राप्त करे I

आओ श्री देवी महापुराण से अति गोपनीय ज्ञान ग्रहण करें

श्री देवी महापुराण से ज्ञान ग्रहण करें

श्री देवी महापुराण से आंशिक लेख तथा सार विचार‘

(संक्षिप्त श्रीमद्देवीभागवत, सचित्र, मोटा टाइप, केवल हिन्दी, सम्पादक-हनुमान प्रसाद पोद्दार, चिम्मनलाल गोस्वामी, प्रकाशक-गोबिन्दभवन-कार्यालय, गीताप्रेस, गोरखपुर)
।।श्रीजगदम्बिकायै नमः।।
श्री देवी मद्भागवत
तीसरा स्कन्ध
राजा परीक्षित ने श्री व्यास जी से ब्रह्मण्ड की रचना के विषय में पूछा। श्री व्यास जी ने कहा कि राजन मैंने यही प्रश्न ऋषिवर नारद जी से पूछा था, वह वर्णन आपसे बताता हूँ। मैंने (श्री व्यास जी ने) श्री नारद जी से पूछा एक ब्रह्मण्ड के रचियता कौन हैं? कोई तो श्री शंकर भगवान को इसका रचियता मानते हैं। कुछ श्री विष्णु जी को तथा कुछ श्री ब्रह्मा जी को तथा बहुत से आचार्य भवानी को सर्व मनोरथ पूर्ण करने वाली बतलाते हैं। वे आदि माया महाशक्ति हैं तथा परमपुरुष के साथ रहकर कार्य सम्पादन करने वाली प्रकृति हैं। ब्रह्म के साथ उनका अभेद सम्बन्ध है।(पृष्ठ 114)
नारद जी ने कहा - व्यास जी ! प्राचीन समय की बात है - यही संदेह मेरे हृदय में भी उत्पन्न हो गया था। तब मैं अपने पिता अमित तेजस्वी ब्रह्मा जी के स्थानपर गया और उनसे इस समय जिस विषय में तुम मुझसे पूछ रहे हो, उसी विषय में मैंने पूछा। मैंने कहा - पिताजी ! यह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड कहां से उत्पन्न हुआ ? इसकी रचना आपने की है या श्री विष्णु जी ने या श्री शंकर जी ने - कृपया सत-सत बताना।
ब्रह्मा जी ने कहा - (पृष्ठ 115 से 120 तथा 123, 125, 128, 129) बेटा ! मैं इस प्रश्न का क्या उत्तर दूँ ? यह प्रश्न बड़ा ही जटिल है। पूर्वकाल में सर्वत्र जल-ही-जल था। तब कमल से मेरी उत्पत्ति हुई। मैं कमल की कर्णिकापर बैठकर विचार करने लगा - ‘इस अगाध जल में मैं कैसे उत्पन्न हो गया ? कौन मेरा रक्षक है? कमलका डंठल पकड़कर जल में उतरा। वहाँ मुझे शेषशायी भगवान् विष्णु का मुझे दर्शन हुआ। वे योगनिद्रा के वशीभूत होकर गाढ़ी नींद में सोये हुए थे। इतने में भगवती योगनिद्रा याद आ गयीं। मैंने उनका स्तवन किया। तब वे कल्याणमयी भगवती श्रीविष्णु के विग्रहसे निकलकर अचिन्त्य रूप धारण करके आकाश में विराजमान हो गयीं। दिव्य आभूषण उनकी छवि बढ़ा रहे थे। जब योगनिद्रा भगवान् विष्णुके शरीर से अलग होकर आकाश में विराजने लगी, तब तुरंत ही श्रीहरि उठ
बैठे। अब वहाँ मैं और भगवान् विष्णु - दो थे। वहीं रूद्र भी प्रकट हो गये। हम तीनों को देवी ने कहा - ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर ! तुम भलीभांति सावधान होकर अपने-अपने कार्यमें संलग्न हो जाओ। सृष्टी, स्थिति और संहार - ये तुम्हारे कार्य हैं। इतनेमें एक सुन्दर विमान आकाश से उतर आया। तब उन देवी नें हमें आज्ञा दी - ‘देवताओं ! निर्भीक होकर इच्छापूर्वक इस विमान में प्रवेश कर जाओ। ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र ! आज मैं तुम्हें एक अद्भुत दृश्य दिखलाती हूँ।‘
हम तीनों देवताओं को उस पर बैठे देखकर देवी ने अपने सामर्थ्य से विमान को आकाश में उड़ा दिया।
इतने में हमारा विमान तेजी से चल पड़ा और वह दिव्यधाम- ब्रह्मलोक में जा पहुंचा। वहाँ एक दूसरे ब्रह्मा विराजमान थे। उन्हें देखकर भगवान् शंकर और विष्णु को बड़ा आश्चर्य हुआ। भगवान् शंकर और विष्णुने मुझसे पूछा-‘चतुरानन ! ये अविनाशी ब्रह्मा कौन हैं ?‘ मैंने उत्तर दिया-‘मुझे कुछ पता नहीं, सृष्टीके अधिष्ठाता ये कौन हैं। भगवन् ! मैं कौन हूँ और हमारा उद्देश्य क्या है - इस उलझन में मेरा मन चक्कर काट रहा है।‘
इतने में मनके समान तीव्रगामी वह विमान तुरंत वहाँ से चल पड़ा और कैलास के सुरम्य शिखरपर जा पहुंचा। वहाँ विमान के पहुंचते ही एक भव्य भवन से त्रिनेत्राधारी भगवान् शंकर निकले। वे नन्दी वृषभपर बैठे थे।
क्षणभर के बाद ही वह विमान उस शिखर से भी पवन के समान तेज चाल से उड़ा और वैकुण्ठ लोकमें पहुंच गया, जहां भगवती लक्ष्मीका विलास-भवन था। बेटा नारद ! वहाँ मैंने जो सम्पति देखी, उसका वर्णन करना मेरे लिए असम्भव है। उस उत्तम पुरी को देखकर विष्णु का मन आश्चर्य के समुद्र में गोता खाने लगा। वहाँ कमललोचन श्रीहरि विराजमान थे। चार भुजाएं थीं।
इतने में ही पवनसे बातें करता हुआ वह विमान तुरंत उड़ गया। आगे अमृत के समान मीठे जल वाला समुद्र मिला। वहीं एक मनोहर द्वीप था। उसी द्वीपमें एक मंगलमय मनोहर पलंग बिछा था। उस उत्तम पलंगपर एक दिव्य रमणी बैठी थीं। हम आपसमें कहने लगे - ‘यह सुन्दरी कौन है और इसका क्या नाम है, हम इसके विषय में बिलकुल अनभिज्ञ हैं।
नारद ! यों संदेहग्रस्त होकर हमलोग वहाँ रूके रहे। तब भगवान् विष्णु ने उन चारुसाहिनी भगवती को देखकर विवेकपूर्वक निश्चय कर लिया कि वे भगवती जगदम्बिका हैं। तब उन्होंने कहा कि ये भगवती हम सभीकी आदि कारण हैं। महाविद्या और महामाया इनके नाम हैं। ये पूर्ण प्रकृति हैं। ये ‘विश्वेश्वरी‘, ‘वेदगर्भा‘ एवं ‘शिवा‘ कहलाती हैं।
ये वे ही दिव्यांगना हैं, जिनके प्रलयार्णवमें मुझे दर्शन हुए थे। उस समय मैं बालकरूपमें था। मुझे पालनेपर ये झुला रही थीं। वटवृक्षके पत्रापर एक सुदृढ़ शैय्या बिछी थी। उसपर लेटकर मैं पैरके अंगूठेको अपने कमल-जैसे मुख में लेकर चूस रहा था तथा खेल रहा था। ये देवी गा-गाकर मुझे झुलाती थीं। वे ही ये देवी हैं। इसमें कोई संदेहकी बात नहीं रही। इन्हें देखकर मुझे पहले की बात याद आ गयी। ये हम सबकी जननी हैं।
श्रीविष्णु ने समयानुसार उन भगवती भुवनेश्वरी की स्तुति आरम्भ कर दी।
भगवान विष्णु बोले - प्रकृति देवीको नमस्कार है। भगवती विधात्राीको निरन्तर नमस्कार है। तुम शुद्धस्वरूपा हो, यह सारा संसार तुम्हींसे उद्भासित हो रहा है। मैं, ब्रह्मा और शंकर - हम सभी तुम्हारी कृपा से ही विद्यमान हैं। हमारा आविर्भाव और तिरोभाव हुआ करता है। केवल तुम्हीं नित्य हो, जगतजननी हो, प्रकृति और सनातनी देवी हो।
भगवान शंकर बोले - ‘देवी ! यदि महाभाग विष्णु तुम्हीं से प्रकट हुए हैं तो उनके बाद उत्पन्न होने वाले ब्रह्मा भी तुम्हारे बालक हुए। फिर मैं तमोगुणी लीला करने वाला शंकर क्या तुम्हारी संतान नहीं हुआ - अर्थात् मुझे भी उत्पन्न करने वाली तुम्हीं हो। इस संसार की सृष्टी, स्थिति और संहार में तुम्हारे गुण सदा समर्थ हैं। उन्हीं तीनों गुणों से उत्पन्न हम ब्रह्मा, विष्णु एवं शंकर नियमानुसार कार्य में तत्पर रहते हैं। मैं, ब्रह्मा और शिव विमान पर चढ़कर जा रहे थे। हमें रास्तेमें नये-नये जगत् दिखायी पड़े। भवानी ! भला, कहिये तो उन्हें किसने बनाया है ?
इसलिए यही प्रमाण देखें श्री मद्देवीभागवत महापुराण सभाषटिकम् समहात्यम्, खेमराज श्री कृष्ण दास प्रकाश मुम्बई, इसमें संस्कृत सहित हिन्दी अनुवाद किया है। तीसरा स्कंद अध्याय 4 पृष्ठ 10, श्लोक 42:-
ब्रह्मा - अहम् इश्वरः फिल ते प्रभावात्सर्वे वयं जनि युता न यदा तू नित्याः, के अन्यसुराः शतमख प्रमुखाः च नित्या नित्या त्वमेव जननी प्रकृतिः पुराणा। (42)
हिन्दी अनुवाद:- हे मात! ब्रह्मा, मैं तथा शिव तुम्हारे ही प्रभाव से जन्मवान हैं, नित्य नही हैं अर्थात् हम अविनाशी नहीं हैं, फिर अन्य इन्द्रादि दूसरे देवता किस प्रकार नित्य हो सकते हैं। तुम ही अविनाशी हो, प्रकृति तथा सनातनी देवी हो। (42)
पृष्ठ 11-12, अध्याय 5, श्लोक 8:यदि दयार्द्रमना न सदांऽबिके कथमहं विहितः च तमोगुणः कमलजश्च रजोगुणसंभवः सुविहितः किमु सत्वगुणों हरिः।(8)
अनुवाद:- भगवान शंकर बोले:-हे मात! यदि हमारे ऊपर आप दयायुक्त हो तो मुझे तमोगुण क्यों बनाया, कमल से उत्पन्न ब्रह्मा को रजोगुण किस लिए बनाया तथा विष्णु को सतगुण क्यों बनाया? अर्थात् जीवों के जन्म-मृत्यु रूपी दुष्कर्म में क्यों लगाया?
श्लोक 12:रमयसे स्वपतिं पुरुषं सदा तव गतिं न हि विह विद्म शिवे (12)
हिन्दी - अपने पति पुरुष अर्थात् काल भगवान के साथ सदा भोग-विलास करती रहती हो। आपकी गति कोई नहीं जानता।
ब्रह्मा जी कहते हैं - मैं भी महामाया जगदम्बिकाके चरणों पर गिर पड़ा और मैंने उनसे कहा माता ! वेद कहते हैं ‘एकमेवाद्वितीयं ब्रह्म‘ है तो क्या वह आत्मस्वरूपा तुम्हीं हो अथवा वह कोई और ही पुरुष है?
देवी ने कहा - मैं और ब्रह्म एक ही हैं। मुझमें और इन ब्रह्ममें कभी किंचितमात्रा भी भेद नहीं है। गौरी, ब्राह्मी, रौद्री, वाराही, वैष्णवी, शिवा, वारुणी, कौबेरी, नारसिंही और वासबी - सभी मेरे रूप हैं। ब्रह्मा जी ! इस शक्तिको तुम अपनी स्त्री बनाओ। ‘महासरस्वती‘ नाम से विख्यात यह सुन्दरी अब सदा तुम्हारी स्त्री होकर रहेगी। भगवती जगदम्बा ने भगवान् विष्णु से कहा - ‘‘विष्णो ! मनको मुग्ध
करनेवाली इस ‘महालक्ष्मी को लेकर अब तुम भी पधारो। यह सदा तुम्हारे वक्षःस्थल में विराजमान रहेगी।
देवी ने कहा-शंकर! मन को मुग्ध करने वाली यह ‘महाकाली‘ गौरी-नाम से विख्यात है। तुम इसे पत्नीरूप से स्वीकार करो।
अब मेरा कार्य सिद्ध करने के लिये विमान पर बैठकर तुमलोग शीघ्र पधारो। कोई कठिन कार्य उपस्थित होनेपर जब तुम मुझे स्मरण करोगे, तब मैं सामने आ जाऊंगी। देवताओ ! मेरा तथा सनातन परमात्मा का ध्यान तुम्हें सदा करते रहना चाहिये। हम दोनों का स्मरण करते रहोगे तो तुम्हारे कार्य सिद्ध होने में किंचितमात्रा भी संदेह नहीं रहेगा।
ब्रह्मा जी कहते हैं - इस प्रकार कहकर भगवती जगदम्बिका ने हमें विदा कर दिया। उन्होंने शुद्ध आचारवाली शक्तियों में से भगवान् विष्णु के लिये महालक्ष्मी को, शंकरके लिये महाकाली को और मेरे लिये महासरस्वती को पत्नी बनने की आज्ञा दे दी। अब उस स्थान से हम चल पडे।
सार विचार:- एक ब्रह्मण्ड की वास्तविक स्थिति से महर्षि व्यास जी, महर्षि नारद जी तथा श्री ब्रह्मा जी, श्री विष्णु जी तथा श्री शंकर जी भी अनभिज्ञ हैं। यह भी स्पष्ट है कि श्री दुर्गा को प्रकृति भी कहते हैं तथा दुर्गा तथा ब्रह्म (ज्योति निरंजन-काल) का पति पत्नी का सम्बन्ध भी है। इसलिए लिखा है कि ब्रह्म के साथ प्रकृति का अभेद सम्बन्ध है, जैसे पत्नी को अर्धांगनी भी कहते हैं। श्री ब्रह्मा जी को स्वयं नहीं पता मैं कहां से उत्पन्न हुआ। हजार वर्ष तक जल में पृथ्वी की खोज की, परन्तु नहीं मिली। तब आकाशवाणी के आधार पर हजार वर्ष तक तप किया। कमल का डंठल पकड कर नीचे उतरा तो वहाँ शेष नाग की शैय्या पर भगवान विष्णु बेहोश पड़े थे। श्री विष्णु के शरीर में से एक देवी निकली (प्रेतनी की तरह) जो सुन्दर आभूषण पहने आकाश में विराजमान हो गई। तब श्री विष्णु जी होश में आए। इतने में शंकर जी भी वहीं आ गए।
उपरोक्त विवरण से सिद्ध है कि तीनों भगवान बेहोश कर रखे थे। फिर सचेत किए। आकाश से विमान आया। देवी ने तीनों प्रभुओं को विमान में बैठने का आदेश दिया। विमान को आकाश में उड़ाया। ऊपर एक ब्रह्मा, एक शिव तथा एक विष्णु और देखा जो ब्रह्मलोक में थे।
विचार करें - ब्रह्मलोक में दूसरे ब्रह्मा, विष्णु तथा शिव दिखाई दिए थे, यह ज्योति निरंजन (ब्रह्म) की ही कलाबाजी है, वही अन्य तीन रूप धारण करके ब्रह्मलोक में तीन गुप्त स्थान (एक रजोगुण प्रधान क्षेत्र, एक सतोगुण प्रधान क्षेत्र, एक तमोगुण प्रधान क्षेत्र) बनाकर रहता है तथा प्रकृति (दुर्गा-अष्टंगी) को अपनी पत्नी रूप में रखता है। जब ये दोनों रजोगुण प्रधान क्षेत्र में होते हैं तब यह महाब्रह्मा तथा दुर्गा महासावित्राी कहलाते हैं। इन दोनों के संयोग से जो पुत्र इस रजोगुण प्रधान क्षेत्र में उत्पन्न होता है वह रजोगुण प्रधान होता है, उसका नाम ब्रह्मा रख देते हैं तथा जवान होने तक अचेत करके परवरिश करते रहते हैं। फिर कमल के फूल पर रखकर सचेत कर देते हैं। जब ये दोनों महाविष्णु तथा महालक्ष्मी रूप में (काल-ब्रह्म तथा दुर्गा) सतोगुण प्रधान क्षेत्र में रहते हैं तब दोनों के पति-पत्नी व्यवहार से जो पुत्र उत्पन्न होता है वह सतोगुण प्रधान होता है, उसका नाम विष्णु रख देते हैं। कुछ दिन के पश्चात् बालक को अचेत करके जवान होने तक परवरिश करते रहते हैं। फिर शेष नाग की शैय्या पर सुला देते हैं। फिर सचेत कर देते हैं। इसी प्रकार जब ये दोनों तमोगुण प्रधान क्षेत्र में रहते हैं तब शिवा अर्थात् दुर्गा तथा महाशिव अर्थात् सदाशिव के पति-पत्नी व्यवहार से जो पुत्र इस क्षेत्र में उत्पन्न होता है, वह तमोगुण प्रधान होता है। इसका नाम शिव रख देते हैं, इसे भी जवान होने तक अचेत रखते हैं, फिर जवान होने पर सचेत करते हैं। फिर तीनों को इक्ट्ठा करके विमान में बैठा कर ऊपर के लोकों का दृश्य दिखाते हैं। कहीं ये अपने आप को सर्वेस्वा न मान बैठें। गुण प्रधान क्षेत्र को समझने के लिए एक उदाहरण है - किसी मकान में तीन कमरे हैं। एक कमरे में देश भक्त शहीदों के चित्र लगे हों, जब व्यक्ति उस कमरे में जाता है तो उसके विचार भी देश भक्तों जैसे हो जाते हैं। दूसरे कमरे में साधु-संतों, ऋषियों आदि के चित्र लगे हों। उस कमरे में प्रवेश करते ही मन शान्त तथा प्रभु भक्ति की तरफ लग जाता है। तीसरे कमरे में अश्लील, अर्धनग्न स्त्री-पुरुषों के चित्र लगे हो तो मन में स्वतः बकवास घर करने लग जाती हैं। इसी प्रकार ऊपर ब्रह्मलोक में काल रूपी ब्रह्म ने तीन स्थान एक-एक गुण प्रधान बनाऐं हैं। तीनों प्रभु (रजगुण ब्रह्माजी, सतगुण विष्णुजी तथा तमगुण शिव जी) अपने गुणों का प्रभाव कैसे डालते हैं। उदाहरण - जैसे रसोईघर में मिर्चों का छोंक सब्जी में लगाया। मिर्च के गुण से सभी कमरों के व्यक्तियों को छींके आने लगी। जैसे साकार वस्तु मिर्च तो रसोई में थी, परन्तु उसकी निराकार शक्ति अर्थात् गुण ने दूर बैठे व्यक्तियों को भी प्रभावित कर दिया। ठीक इसी प्रकार तीनों प्रभु (श्री ब्रह्मा जी रजगुण, श्री विष्णु जी सतगुण तथा श्री शिव जी तमगुण) अपने-अपने लोक में रहते हुए तीन लोक (पृथ्वी लोक, पाताल लोक तथा स्वर्ग लोक) के प्राणियों को प्रभावित रखते हैं। जैसे मोबाईल फोन की रेंज से फोन कार्य करता है। इस प्रकार अदृश शक्ति रूपी गुणों से तीनों देवता अपने पिता काल की सृष्टी उसके आहार के लिए चला रहे हैं। दुर्गा का अपना अलग लोक भी है, जिसमें यह अपने वास्तविक रूप में दर्शन देती है। फिर इनका विमान दुर्गा के द्वीप में पहुंचा। तब ज्योति निरंजन अर्थात् कालरूपी ब्रह्म ने विष्णु जी को बचपन की याद प्रदान कर दी। तब श्री विष्णु जी ने बताया कि यह दुर्गा अपनी तीनों की माता है। मैं बालक रूप में पालने में लेटा था, यह मुझे लोरी देकर झुला रही थी। तब श्री विष्णु जी ने कहा कि हे दुर्गा आप हमारी माता हो। मैं (विष्णु) ब्रह्मा तथा शंकर तो जन्मवान हैं। हमारा तो आविर्भाव अर्थात् जन्म तथा तिरोभाव अर्थात् मृत्यु होती है, हम अविनाशी नहीं हैं। आप प्रकृति देवी हो। यह बात श्री शंकर जी ने भी स्वीकार की तथा कहा कि मैं तमोगुणी लीला करने वाला शंकर भी आपका ही पुत्र हूँ। श्री विष्णु जी तथा श्री ब्रह्मा जी भी आप से ही उत्पन्न हुए हैं।
फिर इन तीनों देवताओं की शादी दुर्गा ने की। प्रकृति देवी (दुर्गा) ने अपनी शब्द शक्ति से अपने ही अन्य तीन रूप धारण किए। श्री ब्रह्मा जी की शादी सावित्री से, श्री विष्णु जी की शादी लक्ष्मी से तथा श्री शिव जी की शादी उमा अर्थात् काली से करके विमान में बैठाकर इन के अलग-अलग द्वीपों (लोकों) में भेज दिया।
ज्योति निरंजन (काल-ब्रह्म) ने अपने स्वांसों द्वारा समुद्र में चार वेद छुपा दिए।  फिर प्रथम सागर मंथन के समय ऊपर प्रकट कर दिए। ज्योति निरंजन (काल) के आदेश से दुर्गा ने चारों वेद श्री ब्रह्मा जी को दिए। ब्रह्मा ने दुर्गा (अपनी माता) से पूछा कि वेदों में जो ब्रह्म (प्रभु) कहा है वे आप ही हो या कोई अन्य पुरुष है।
दुर्गा ने काल के डर से वास्तविकता छुपाने की चेष्टा करते हुए कहा कि मैं तथा ब्रह्म एक ही हैं, कोई भेद नहीं। फिर भी वास्तविकता नहीं छुपी। दुर्गा ने फिर कहा कि तुम तीनों मेरा तथा ब्रह्म का सदा स्मरण करते रहना। हम दोनों का स्मरण करते रहने से यदि कोई कठिन कार्य होगा तो मैं तुरन्त सामने आ जाऊंगी।
विशेष - क्योंकि काल ने दुर्गा से कह रखा है कि मेरा भेद किसी को नहीं कहना है। इस डर से दुर्गा सर्व जगत् को वास्तविकता से अपरिचित रखती है। ये अपने पुत्रों को भी धोखे में रखते हैं। इसका कारण है कि काल को शाप लगा है एक लाख मानव शरीरधारी प्राणियों का आहार नित्य करने का। इसलिए अपने तीनों पुत्रों से अपना आहार तैयार करवाता है। श्री ब्रह्मा जी के रजगुण से प्रभावित करके सर्व प्राणियों से संतान उत्पति करवाता है। श्री विष्णु जी के सतोगुण से एक दूसरे में मोह उत्पन्न करके स्थिति अर्थात् काल जाल में रोके रखता है तथा श्री शंकर जी के तमोगुण से संहार करवा कर अपना आहार तैयार करवाता है।
फिर तीनों प्रभुओं को भी मार कर खाता है तथा नए पुण्य कर्मी प्राणियों में से तीन पुत्र उत्पन्न करके अपना कार्य जारी रखता है तथा पूर्व वाले तीनों ब्रह्मा, विष्णु तथा शिव चैरासी लाख योनियों तथा स्वर्ग-नरक में कर्म आधार से चक्र लगाते रहते हैं। यही प्रमाण शिव महापुराण, रूद्र संहिता, प्रथम (सृष्टी) खण्ड, अध्याय 6, 7 तथा 8, 9 में भी है।

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क्या ध्यान करने से और व्रत रखने से शांति प्राप्त होगी इस बारे में पवित्र गीता जी में भगवान् का क्या आदेश है पढिये

क्या ध्यान करने से और व्रत रखने से शांति प्राप्त होगी

प्रश्न - मैं गीता अध्याय 6 श्लोक 10 से 15 में वर्णित विधि अनुसार एक आसन पर बैठकर सिर आदि अंगों को सम करके ध्यान करता हूँ, एकादशी का व्रत भी रखता हूँ इस प्रकार शान्ति को प्राप्त हो जाऊँगा।
उत्तर - कृप्या आप गीता अध्याय 6 श्लोक 16 को भी पढ़े जिसमें लिखा है कि हे अर्जुन यह योग (साधना) न तो अधिक खाने वाले का, न बिल्कुल न खाने (व्रत रखने) वाले का सिद्ध होता है। न अधिक जागने वाले का न अधिक श्यन करने (सोने) वाले का सिद्ध होता है न ही एक स्थान पर बैठकर साधना करने वाले का सिद्ध होता है। गीता अध्याय 6 श्लोक 10 से 15 तक वर्णित विधि का खण्डन गीता अध्याय 3 का श्लोक 5 से 9 में किया है कि जो मूर्ख व्यक्ति समस्त कर्म इन्द्रियों को हठपूर्वक रोक कर अर्थात् एक स्थान पर बैठकर चिन्तन करता है वह पाखण्डी कहलाता है। इसलिए कर्मयोगी (कार्य करते-2 साधना करने वाला साधक) ही श्रेष्ठ है। वास्तविक भक्ति विधि के लिए गीता ज्ञान दाता प्रभु (ब्रह्म) किसी तत्वदर्शी की खोज करने को कहता है (गीता अध्याय 4 श्लोक 34) इस से सिद्ध है गीता ज्ञान दाता (ब्रह्म) द्वारा बताई गई भक्ति विधि पूर्ण नहीं है। इसलिए गीता अध्याय 6 श्लोक 10 से 15 तक ब्रह्म (क्षर पुरुष-काल) द्वारा अपनी साधना का वर्णन है तथा अपनी साधना से होने वाली शान्ति को अति घटिया (अनुत्तमाम्) गीता अध्याय 7 श्लोक 18 में कहा है। उपरोक्त अध्याय 6 श्लोक 10 से 15 में कहा है कि मन और इन्द्रियों को वश में रखने वाला साधक एक विशेष आसन तैयार करे। जो न अधिक ऊंचा हो, न अधिक नीचा। उस आसन पर बैठ कर चित तथा इन्द्रियों को वश में रखकर मन को एकाग्र करके अभ्यास करे। सीधा बैठकर ब्रह्मचर्य का पालन करता हुआ मन को रोक कर प्रयाण होवे। इस प्रकार साधना में लगा साधक मुझमें रहने वाली (निर्वाणपरमाम्) अति बेजान अर्थात् बिल्कुल मरी हुई (नाम मात्र)
शान्ति को प्राप्त होता है। इसीलिए गीता अध्याय 7 श्लोक 18 में अपनी साधना से होने वाली गति (लाभ) को अति घटिया (अनुत्तमाम्) कहा है। इसी गीता अध्याय 18 श्लोक 62 तथा अध्याय 15 श्लोक 4 में कहा है कि हे अर्जुन ! तू परम शान्ति तथा सतलोक को प्राप्त होगा, फिर पुनर् जन्म नहीं होता, पूर्ण मोक्ष प्राप्त हो जाता है। मैं (गीता ज्ञान दाता प्रभु) भी उसी आदि नारायण पुरुष परमेश्वर की शरण हूँ, इसलिए दृढ़ निश्चय करके उसी की साधना व पूजा करनी चाहिए।
अपनी साधना के अटकल युक्त ज्ञान के आधार पर बताए मार्ग को अध्याय 6 श्लोक 47 में भी स्वयं (युक्ततमः मतः) अर्थात् अज्ञान अंधकार वाले विचार कहा है। अन्य अनुवाद कर्ताओं ने ‘मे युक्ततमः मतः‘ का अर्थ ‘परम श्रेष्ठ मान्य है‘ किया है, जबकि करना था कि यह मेरा अटकल लगाया अज्ञान अंधकार के आधार पर दिया मत है। क्योंकि यथार्थ ज्ञान के विषय में किसी तत्वदर्शी सन्त से जानने को कहा है (गीता अध्याय 4 श्लोक 34 में) वास्तविक अनुवाद गीता अध्याय 6 श्लोक 47 का -
अध्याय 6 का श्लोक 47
योगिनाम्, अपि, सर्वेषाम्, मद्गतेन, अन्तरात्मना,
श्रद्धावान्, भजते, यः, माम्, सः, मे, युक्ततमः, मतः।।
अनुवाद: मेरे द्वारा दिए भक्ति विचार जो अटकल लगाया हुआ उपरोक्त श्लोक 10 से 15 में वर्णित पूजा विधि जो मैंने अनुमान सा बताया है, पूर्ण ज्ञान नहीं है, क्योंकि (सर्वेषाम्) सर्व (योगिनाम्) साधकों में (यः) जो (श्रद्धावान्) पूर्ण आस्था से (अन्तरात्मना) सच्ची लगन से (मद्गतेन्) मेरे द्वारा दिए भक्ति मत के अनुसार (माम्) मुझे (भजते) भजता है (सः) वह (अपि) भी (युक्ततमः) अज्ञा अंधकार से जन्म-मरण स्वर्ग-नरक वाली साधना में ही लीन है। यह (मे) मेरा (मतः) विचार है।
इसी का प्रमाण पवित्र गीता अध्याय 7 श्लोक 18 में तथा गीता अध्याय 5 श्लोक 29 तथा गीता अध्याय 6 श्लोक 15 में स्पष्ट है। इसीलिए गीता अध्याय 18 श्लोक 62 में कहा है कि हे भारत, तू सर्व भाव से उस  परमात्मा की शरण में जा, उसकी कृपा से ही तू परमशान्ति को तथा सनातन परम धाम अर्थात् सतलोक को प्राप्त होगा। गीता अध्याय 15 श्लोक 4 में कहा है कि जब तुझे गीता अध्याय 4 श्लोक 34 में वर्णित तत्वदर्शी संत मिल जाए उसके पश्चात उस परमपद परमेश्वर को भली भाँति खोजना चाहिए, जिसमें गए हुए साधक फिर लौट कर इस संसार में नहीं आते अर्थात् जन्म-मृत्यु से सदा के लिए मुक्त हो जाते हैं। जिस परमेश्वर ने संसार रूपी वृक्ष की रचना की है, मैं भी उसी आदि पुरुष परमेश्वर की शरण में हूँ। उसी की भक्ति करनी चाहिए।
गीता अध्याय 3 श्लोक 5 से 9 में भी गीता अध्याय 6 श्लोक 10 से 15 के ज्ञान को गलत सिद्ध किया है। अर्जुन ने पूछा प्रभु मन को रोकना बहुत कठिन है। भगवान ने उत्तर दिया अर्जुन मन को रोकना तो वायु को रोकने के समान है। फिर यह भी कहा है कि निःसंदेह कोई भी व्यक्ति किसी भी समय क्षण मात्रा भी कर्म किए बिना नहीं रहता। जो महामूर्ख मनुष्य समस्त कर्म इन्द्रियों को हठपूर्वक ऊपर से रोककर मन से कुछ न कुछ सोचता रहता है। इसलिए एक स्थान पर हठयोग करके न बैठ कर सांसारिक कार्य करते-करते (कर्मयोग) साधना करना ही श्रेष्ठ है। कर्म न करने अर्थात् हठ योग से एक स्थान पर बैठ कर साधना करने की अपेक्षा कर्म करते-करते साधना श्रेष्ठ है। एक स्थान पर बैठ कर साधना (अकर्मणा) करने से तेरा जीवन निर्वाह कैसे होगा? शास्त्र विधि त्याग कर साधना (हठयोग एक आसन पर बैठकर) करने से कर्म बन्धन का कारण है, दूसरा जो शास्त्र अनुकूल कर्म करते-करते साधना करना ही श्रेष्ठ है। इसलिए सांसारिक कार्य करता हुआ साधना कर। गीता अध्याय 8 श्लोक 7 में कहा है कि युद्ध भी कर, मेरा स्मरण भी कर, इस प्रकार मुझे ही प्राप्त होगा। गीता अध्याय 7 श्लोक 18 में तथा अध्याय 18 श्लोक 62 में कहा है कि परन्तु मेरी साधना से होने वाली (गति) लाभ अति घटिया (अनुत्तमाम्) है। इसलिए उस परमेश्वर की शरण में जा जिसकी कृपा से तू परमशान्ति तथा (शाश्वतम् स्थानम्) सतलोक को प्राप्त होगा। उस परमेश्वर की भक्ति विधि तथा पूर्ण ज्ञान (तत्वज्ञान) किसी तत्वदर्शी संत की खोज करके उससे पूछ, मैं (गीता ज्ञान दाता ब्रह्म/क्षर पुरुष) भी नहीं जानता।